अनुच्छेद 289 - Page 223

204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अब नियुक्ति के प्रश्न के संबंध में मुझे स्वीकार करना पड़ेगा कि मेरे मित्र प्रोफेसर सक्सेना के कथन में काफी बल है कि निर्वाचन आयुक्त की पदावधि को निश्चित और सुरक्षित करने से कोई लाभ नहीं है, यदि संविधान में ऐसे व्यक्ति को वर्जित करने का कोई उपबन्ध न हो जो कि मूर्ख या दुष्ट या ऐसा व्यक्ति हो जो कि कार्यपालिका की मुट्टòी में रह सकता हो। मुझे स्वीकार करना है कि मेरे उपबंध में कोई ऐसी बात नहीं है जिससे कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त या अन्य निर्वाचन आयुक्तों के पद पर किसी अनुपयुक्त व्यक्ति को नामनिर्देशित होने से रोका जा सके। मैं यह भी स्वीकार करना चाहता हूँ कि यह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रश्न है जिससे मुझे बहुत सरदर्द रहा है और मुझे इस पर संदेह नहीं है कि इससे सदन को बहुत सरदर्दी होगी। संयुक्त राज्य अमरीका ने इस प्रश्न का हल अपने संविधान के अनुच्छेद 2 धारा (2) के उपबंध द्वारा कर लिया है जिससे कि अनुच्छेद 2 की धारा (2) में उल्लिखित कुछ नियुक्तियाँ राष्ट्रपति द्वारा सीनेट से पूछे बिना नहीं की जा सकतीं_ जिससे कि जहाँ तक नियुक्ति की शक्ति का संबंध है, यद्यपि वह राष्ट्रपति में निहित है तदापि इस पर सीनेट को देखभाल का अधिकार है जिससे कि सीनेट किसी समय जब कोई नाम प्रस्तावित किया जाए, पूछताछ करके अपने आपको संतुष्ट कर सकती है कि प्रस्तावित व्यक्ति समुचित व्यक्ति है। परन्तु यह भी समझ लेना चाहिए कि वह बहुत विलम्बकारी तरीका है। जब नियुक्ति की जाए तब शायद संसद समवेत न हो और नियुक्ति करना तत्काल आवश्यक हो सकता है। दूसरे अमरीकी आचरण से नियुक्तियाँ करने में राजनैतिक विचार प्रविष्ट हो सकते हैं और वास्तव में ऐसा होता भी है। परिणामतः मैं यह तो समझता हूँ कि अमरीकी संविधान के उपबंध नियुक्तियाँ करने में राष्ट्रपति पर अत्यन्त ठीक रोक है पर उससे प्रशासनिक कठिनाइयाँ हो सकती हैं और इसीलिए मैं हिचकिचा रहा हूँ कि क्या मुझे आगे चलकर अपने संविधान में अमरीकी उपबंधों के रखने की सिफारिश करनी चाहिए। मसौदा-समिति ने इस प्रश्न पर अत्यधिक विचार किया है, क्योंकि, जैसा कि मैं कह चुका हूँ, यह हमारे लिए सबसे बड़ा सरदर्द है, और मध्यवर्ती उपाय के रूप में यह विचार किया गया था कि यदि यह सभी राष्ट्रपति के लिए तथाकथित अनुदेश पत्र बना दे ओर दे दें और उसमें नियुक्तियाँ करने से पूर्व कोई ऐसी व्यवस्था रख दे जिससे परामर्श करना राष्ट्रपति के लिए आवश्यक हो तो मेरे विचार में अमरीकी संविधान से जो कठिनाइयाँ पैदा होती प्रतीत होती हैं वे हट सकती हैं और उसमें जो लाभ है वह प्राप्त हो सकता है। इस समय मेरे लिए यह कहना असंभव है कि जब सदन के समक्ष उन अनुदेशों का मसौदा आएगा तब सदन का क्या दृष्टिकोण होगा। यदि सदन मसौदा -समिति के इस सुझाव को ठुकरा दे कि राष्ट्रपति के लिए एक अनुदेश पत्र होना चाहिए, जिसमें अन्य बातों के अतिरिक्त नियुक्तियाँ करने के विषय में भी एक उपबंध होना चाहिए, तो फिर यह समस्या उस प्रकार सुलझ जाएगी। किन्तु जैसा कि मैंने कहा है, मेरे लिए यह कहना कठिन है कि क्या होगा। अतः अपने माननीय मित्र