205
प्रो. सक्सेना की आलोचना को मानकर, जो मेरे माननीय मित्र पंडित कुंजरू की आलोचना से समर्थित हुई है, मैं संशोधन संख्या 99 में कुछ संशोधन करने के लिए तैयार हूँ। मुझे अफसोस है कि मुझे इन संशोधनों को घुमाने का समय नहीं मिला, किन्तु मैं उन्हें पढ़ दूंगा तो सदन को पता लग जाएगा कि मैं क्या प्रस्ताव कर रहा हूँ।
मेरा प्रथम संशोधन यह हैः
फ्कि खंड (1) के अन्त में फ्राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाएगाय् ये शब्द हटा दिए जाएं।
फ्खंड (2) की पंक्ति 4 में नियुक्त करना ( appoint ) शब्द के स्थान पर नियत 'fix' शब्द रख दिए जाएं, तथा उसके पश्चात् निम्न प्रविष्ट कर दिए जाएंः
फ्मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा इस संबंध में बनाए गए किसी कानून के उपबंधों के अन्तर्गत राष्ट्रपति द्वारा की जाएंगी।य्
फ्जब कोई अन्य चुनाव आयुक्त इस प्रकार नियुक्त किया जाएगा।य्
आदि, इन शब्दों के पश्चात् शेष खंड की संख्या खंड (2-क) कर दी जाए।
श्री एम. अनन्तशयनम् आयंगर (मद्रासः जनरल)ः श्रीमन्, एक औचित्य का प्रश्न है। नई बातें पेश की जा रही हैं जिनके लिए इस समय अनुमति नहीं मिलनी चाहिए, अन्यथा इस पर और वाद-विवाद आवश्यक होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे आशा है कि सभापति अन्य सदस्यों को अपने विचार प्रकट करने की अनुमति देंगे।
माननीय सभापतिः मेरे विचार में ऐसी अवस्था में सर्वोत्तम उपाय इस अनुच्छेद पर विचार को स्थगित कर देना होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ये संशोधन बिल्कुल आपत्तिजनक नहीं है_ उनमें यही लिखा है कि जो कुछ किया जाए वह संसद द्वारा निर्मित विधियों के अधीन होना चाहिए।
श्री टी.टी. कृष्णमाचारी (मद्रासः जनरल)ः मेरा सुझाव है कि इन संशोधनों की प्रतिलिपियाँ तैयार करा कर सदस्यों को दे दी जाएँ और उन्हें बाद में लिया जाए।
माननीय श्री के. सन्थानम् (मद्रासः जनरल)ः मेरा सुझाव है कि इन पर मसौदा-समिति विचार करे। चाहे वे पारिभाषिक ही हों, पर हमें उन पर विचार करने का अवसर मिलना चाहिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इन संशोधनों को मसौदा-समिति से परामर्श करके ही पेश किया गया है।
* * * * *