206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय सभापतिः संशोधनों को पेश होने दिया जाए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरा अगला संशोधन यह हैः
फ्कि खंड (4) के आरंभ में ये शब्द प्रविष्ट कर दिए जाएँः
इस विषय में संसद द्वारा बताई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए।य्
माननीय श्री के. सन्थानम्ः श्रीमान् यह सारवान संशोधन है क्योंकि राष्ट्रपति के स्वविवेक पर संसदीय विधि का बन्धन पड़ सकता है।
माननीय सभापतिः मैं नहीं समझता कि अधिक बहस आवश्यक है_ इन्हें पेश होने दिया जाए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आप संविधान पर तकनीकी बातों से विचार नहीं कर सकते। अत्यधिक तकनीकी बातों से संविधान-निर्माण नष्ट हो जाएगा।
श्री एच.वी. कामतः आपने उस दिन निर्णय किया था कि सारवान संशोधन स्थगित कर दिए जाएंगे
माननीय सभापतिः यदि इन्हें सारवान संशोधन समझा जाता है तो वे स्थगित कर दिए जाएंगें सदन में काफी लोग स्थगन के पक्ष में प्रतीत होते हैं, अतः बहस स्थगित रहेगी।
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नया अनुच्छेद 289-क
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान् मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि प्रथम सूची (पंचम सप्ताह) के संशोधन संख्या 110 के निर्देश से प्रस्तावित अनुच्छेद 289-क के स्थान पर निम्न अनुच्छेद रख दिया जाएः
289ः (क). संसद के प्रत्येक सदन अथवा किसी राज्य के विधानमंडल के सदन
लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के लिए चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर लेना।
धर्म, प्रजाति, जाति या लिंग के आधार पर कोई व्यक्ति निर्वाचक नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए न तो अपात्र होगा न ही उससे निकाले जाने के लिए दावा करेगा। या प्रत्येक सदन के लिए निर्वाचन के हेतु प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्र के लिए एक सामान्य निर्वाचक नामावली होगी तथा केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या इनमें से किसी के आधार पर कोई व्यक्ति ऐसी किसी नामावली में सम्मिलित किए जाने के