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किसी राज्य के विधानमंडल ‘291. इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए तथा को ऐसे विधानमंडल के जहाँ तक इस संबंध में संसद किसी राज्य के विधानमंडल लिए निर्वाचनों के संबंध में को ऐसे विधानमंडल के लिए निर्वाचनों के संबंध में उपबंध उपबंध बनाने की शक्ति बनाने की शक्ति उपबंध नहीं बनाती वहाँ तक, किसी
राज्य का मंडल, समय-समय पर, विधि द्वारा, उस राज्य के विधानमंडल के सदन या प्रत्येक सदन के लिए निर्वाचनों से सम्बद्ध या तत्संबंधी विषयों के संबंध में, जिनके अन्तर्गत ऐसे सदन या सदनों का सम्यव्Q गठन कराने के लिए आवश्यक विषय भी है, उपबंध कर सकेगा।’’
श्रीमान् आपकी अनुमति से मैं छठी सूची, पंचम सप्ताह, के संशोधन संख्या 211 को भी पेश करता हूँ।
संशोधन इस प्रकार हैः
फ्कि प्रथम सूची (पंचम सप्ताह) के संशोधन संख्या 128 के संदर्भ में नए अनुच्छेद 291 में, ‘अन्तर्गत’ शब्द के पश्चात् ‘निर्वाचन नामावलियों को तैयार करना तथा’ ये शब्द प्रविष्ट किए जाएँ।
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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे खयाल में श्री कामत ने दोनों अनुच्छेदों 290 और 291 को या तो ठीक प्रकार से पढ़ा नहीं है या ठीक प्रकार से समझा नहीं है। अनुच्छेद 290 में संसद को शक्ति दी गई है, पर 291 में लिखा है कि यदि कोई ऐसा मामला है जिस पर संसद ने उपबंध नहीं बनाया है तो राज्य विधानमंडल को उस पर उपबंध बनाने का अधिकार होगा। यह एक प्रकार का अवशेष है जो संसद राज्य विधानमंडल के अतिरिक्त छोड़ सकती है। यह तो शेषाधिकार संबंधी अनुच्छेद है। इसके अतिरिक्त इसमें कुछ नहीं है।
श्री ए. थानु पिल्लै (ट्रावंकोर राज्य)ः जब समय-सारिणी के अनुसार काम करना हो, तब क्या स्थानीय विधानमंडल को प्रतीक्षा करनी होगी और यह देखना होगा कि केन्द्रीय संसद क्या करती है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः प्रधानतः 290 के अधीन उपबंध बनाना संसद का कर्त्तव्य होगा। यह उत्तरदायित्व पूर्णतः संसद पर डाल दिया गया है। संसद का यह कर्त्तव्य और उत्तरदायित्व होगा कि वह 290 में समाविष्ट मामलों के विषय में विधि द्वारा उपबंध करे, यदि किसी मामले पर संसद द्वारा स्पष्ट और विशिष्ट उपबंध न बनाया गया हो, तो 291 में लिखा है कि संसद 290 में समाविष्ट जिस मामले पर उपबंध न बना
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 16 जून, 1949, पृ. 933
+ पूर्वोक्त, पृष्ठ 934
++ पूर्वोक्त, पृष्ठ 935