210 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सकी है उस पर कोई उपबंध बनाने का राज्य का विधानमंडल को अपवर्जन न होगा।
श्री ए. थानु पिल्लैः क्या मैं डॉ. अम्बेडकर से जान सकता हूँ कि क्या यह अच्छा नहीं होगा कि इस मामले में केन्द्रीय विधानमंडल का स्थानीय विधानमंडल पर ही समस्त उत्तरदायित्व डाल दिया जाए, जिससे कि निर्वाचन समय के अनुसार हो सके?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं सहमत नहीं हूँ। कई मामले महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं और जिन पर संसद यह समझ सकती है कि वह स्वयं ही उपबंध करें। कई अन्य मामलों पर संसद समझ सकती है कि वे स्थानीय महत्त्व के हैं अतः उन पर प्रान्त, प्रान्त में भिन्नता हो सकती है अतः उन्हें संसद स्थानीय विधानमंडल पर छोड़ना अच्छा समझ सकती है। इसी कारण 290 और 291 में अन्तर रखा गया है।
(डॉ. अम्बेडकर का संशोधन स्वीकार किया गया। संशोधित अनुच्छेद 291 संविधान में जोड़ा गया।)
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नवीन अनुच्छेद 291-क
माननीय डॉ. बी.आार. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि अनुच्छेद 291 के पश्चात् निम्न नया अनुच्छेद प्रविष्ट किया जाएः निर्वाचन संबंधी ‘291-क. इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी- निर्वाचन मामलों में न्यायालय संबंधी मामलों में न्यायालय की सीमा पर रोक की सीमा पर रोक निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालय की सीमा पर रोक
(ख) संसद के किसी भी सदन अथवा राज्य विधानमंडलों
के किसी भी सदन के किसी निर्वाचन पर ऐसी निर्वाचन याचिका
के बिना कोई आपत्ति न की जाएगी जो ऐसे प्राधिकारी को तथा
ऐसी रीति से न प्रस्तुत की गई हो जो समुचित विधानमंडल
द्वारा निर्मित विधि के द्वारा या उसके अधीन उपबंधित है_
(ग) ऐसे किसी निर्वाचन या ऐसे निर्वाचन की किसी स्थिति के संबंध में या
उसके विषय में कार्यवाही की अन्तता के लिए उपयुक्त विधानमंडल द्वारा
निर्मित किसी विधि के अधीन या उसके द्वारा उपबंध किया जा सकेगा।’
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 16 जून, 1949, पृ. 937
+ पूर्वोक्त, पृष्ठ 942
++ पूर्वोक्त, पृष्ठ 943
# पूर्वोक्त पृष्ठ 945