212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(डॉ. अम्बेडकर का उक्त संशोधन स्वीकार किया गया। यथा संशोधित अनुच्छेद सं. 300 संविधान में जोड़ा गया।)
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अनुच्छेद 301
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि अनुच्छेद 301 के खंड (3) में, ‘संसद’ शब्द के स्थान पर ‘संसद का प्रत्येक सदन’ ये शब्द रखे जाएँ।य्
(डॉ. अम्बेडकर के संशोधन से यथासंशोधित अनुच्छेद 301 संविधान में जोड़ा गया।)
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माननीय सभापतिः आप फिर यही धारणा बना रहे हैं कि सदन का सत्र होगा।
श्री जसपतराय कपूरः निस्संदेह मैंने जो कुछ निवेदन किया था वह इसी धारणा पर था किन्तु मैं नहीं जानता कि इसका और भी कुछ अर्थ निकल सकता है। हम हर स्थान पर देखते हैं कि सदस्यगण राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा राज्य-परिषद् के सदस्यों को विधानमंडल के सदस्य होने के नाते निर्वाचित करेंगे, किसी और हैसियत से नहीं। उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 55 में लिखा है कि उपराष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा एक मीटिंग (अधिवेशन) में निर्वाचित होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः शब्द ये हैं फ्संयुक्त अधिवेशन (मीटिंग) मेंय् फ्बैठक (सिटिंग)य् में नहीं।
श्री जसपतराय कपूरः यह ठीक होगा यदि इस बात को सदन में प्राधिकार से कह दिया जाए, जिससे कि इस अनुच्छेद का भिन्न प्रकार से अर्थ निकालने की संभावना न रहे।
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 16 जून, 1949, पृ. 952
+ पूर्वोक्त, पृष्ठ 958