अनुच्छेद 68-क - Page 26

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ किः

फ्अनुच्छेद 68 के बाद निम्नलिखित नया अनुच्छेद अन्तःस्थापित किया जाएः-

68-क कोई व्यक्ति संसद के किसी स्थान को भरने के लिए चुने जाने के लिए तभी अर्हित होगा जब -

(क) वह भारत का नागरिक है।

(ख) वह राज्य सभा में स्थान के लिए कम से कम पैंतीस वर्ष की आयु का और

लोक सभा में स्थान के लिए कम से कम पच्चीस वर्ष की आयु का है_ और

(ग) उसके पास ऐसी अन्य अर्हताएं हैं जो संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि

द्वारा या उसके अधीन इस निमित्त विहित की जाएँ।

महोदय, इस अनुच्छेद का उद्देश्य चुनाव के उम्मीदवार बनने के इच्छुक व्यक्ति के लिए योग्यताओं का निर्धारण करना है। सामान्यतः नियम यह है कि कोई भी व्यक्ति, जों कि एक मतदाता है, महज इस तथ्य के कारण ही कि वह एक मतदाता है, को चुनाव में उम्मीदवार बनने का हक प्राप्त है। इस अनुच्छेद में यह प्रस्ताव किया गया है कि चुनाव के लिए उम्मीदवार बनने के इच्छुक व्यक्ति के लिए उसका मतदाता होना एक अनिवार्य योग्यता है। लेकिन, इसके साथ ही उसे कुछ अतिरिक्त योग्यताओं को भी पूरा करना होगा। इस नए अनुच्छेद 68-क में इन अतिरिक्त योग्यताओं का निर्धारण किया गया है।

मेरे विचार से सभा इस बात पर सहमत होगी कि यह वांछनीय है कि जो उम्मीदवार विधानमण्डल में अपनी सेवा देने का इच्छुक हो, उसकी योग्यता महज एक मतदाता होने के अलावा कुछ और भी होनी चाहिए। सभा के अन्दर उसे जिस प्रकार के कार्य करने की जरूरत पड़ेगी, उसके लिए जरूरी है कि उसके पास कुछ अनुभव हो और दुनियादारी के मामले में उसके पास कुछ ज्ञान ओर व्यावहारिक अनुभव हो और मैं समझता हूँ कि यदि इन अतिरिक्त योग्यताओं को स्वीकृति दे दी जाती है, तो हम लोग समुचित प्रकार के उम्मीदवारों को चयन के मामले में सुरक्षित हो जाएंगे, जो कि सभा में एक साधारण मतदाता के मुकाबले कहीं अधिक बेहतर सेवा प्रदान कर सकते हैं।

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* श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः इस साधारण से मुद्दे पर बहुत कुछ कहा जा चुका है कि डॉ. अम्बेडकर का संशोधन शरारतपूर्ण और हानिकारक है। मैं आशा करता हूँ कि सभा यह महसूस करेगी कि इस प्रकार की टिप्पणियों से वस्तुतः स्थिति अतिशयोक्तिपूर्ण हो जाती है और समस्या पर वास्तव में विचार नहीं हो पाता। मैं डॉ. अम्बेडकर के संशोधन पर श्रीमती दुर्गा बाई द्वारा प्रस्तुत संशोधन का समर्थन करता हूँ। * ख्., वही, पृष्ठ 94