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हटाया जा सके और विपक्ष के नेता सरकार का प्रभार संभाल सके तथा उसी संसद को भंग किए बगैर उसी की सहायता से आगे का राज-काज चला सके। यदि राजा सरकार चलाने और प्रशासन संभालने की जिम्मेदारी स्वीकार करने हेतु विपक्ष के नेता या संसद के किसी सदस्य को मनाने में विफल रहता है, तो वह सभा भंग करने के लिए बाध्य है। उसी प्रकार से भारतीय संघ का राष्ट्रपति सभा की भावनाओं की जांच करेगा कि सभा को भंग कर दिया जाना चाहिए अथवा सभा इस बात पर सहमत है कि सरकार चलाने की जिम्मेदारी सभा को भंग किए बगैर किसी और नेता को दी जानी चाहिए। यदि उसे यह लगता है कि सभा की यह भावना है कि सभा को भंग किए जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है तो वह एक संवैधानिक राष्ट्रपति के रूप में निश्चय ही सभा को भंग किए जाने की प्रधानमंत्री की सलाह को स्वीकार करेगा। इसलिए, मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री द्वारा सभा को भंग किए जाने की इच्छा व्यक्त करने के मामले में उसके द्वारा लिखित में कारण बताए जाने पर जोर दिया जाना निरर्थक है और जिस पत्र पर वह कारण बताया गया हो, उसका कोई मूल्य नहीं है। सभा की भावना की जांच करके यह पता लगाने कि प्रधानमंत्री ठोस कारणों से सभा को भंग करने के लिए कह रहा है अथवा पूरी तरह से अपने दलगत हितों के कारण ऐसा कह रहा है, के राष्ट्रपति के पास अन्य तरीके मौजूद हैं। मेरे विचार से हमें राष्ट्रपति पर विश्वास करना चाहिए। वह दलीय नेताओं तथा सभा के सम्पूर्ण हित के मध्य सही निर्णय ले सके। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि इस संशोधन को स्वीकार किया जाना चाहिए।

माननीय सभापतिः अब मैं संशोधनों पर एक-एक करके मत लूँगा।

¹सभी संशोधन अस्वीकृत हुए। अनुच्छेद 69 को सं विधान में जोड़ा गया।ह्

अनुच्छेद 71

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः प्रो. के.टी. शाह सीधे उन शब्दों को बनाए रखना चाहते हैं, जो इन्होंने प्रयुक्त किए हैं_ मेरे विवेक के अनुसार ‘इसके आहूत किए जाने के कारणों’ जैसे वाक्य पूरी तरह से स्पष्ट हैं और मैं समझता हूँ कि प्रो. के.टी. शाह जिन शब्दों को बनाए रखना चाहते हैं, को विस्तृत रूप से शामिल करने के लिए यह वाक्य पर्याप्त हैं और यदि मैं कहूँ कि यह जो वाक्य है ‘शैल एड्रेस एण्ड इन फॉरम पार्लियामेंट ऑफ दी कॉजेज ऑफ इट्स सम्मनस’, उसे ब्रिटिश संसद के मामले में प्रयोग में लाया गया है। यदि प्रो. शाह हाऊस ऑफ कॉमन्स के नियमों के बारे में कैम्पियन द्वारा लिखी गई पुस्तक को देखें तो वह पाएंगे कि उसमें इस वाक्य का प्रयोग किया गया है और एक समुचित वाक्य

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 18 मई, 1949, पृ. 110