14 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की खोज करने में लम्बे समय तक जुटे रहने और काफी प्रयास करने के बाद सौभाग्य से ये शब्द कैम्पियन की पुस्तक में ढूंढ पाने में हम सफल रहे और मेरे विचार से यह एक बहुत अच्छा वाक्य है, जिसे बनाए रखा जाना चाहिए क्योंकि यह उन सभी पहलुओं को समेटे हुए है, जो प्रो. के.टी. शाह इसमें शामिल कराना चाहते हैं। प्रो. के.टी. शाह ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा संदेश भेजने तथा सभा को अन्य रूप में संबोधित करने हेतु एक उपबंध किया जाना चाहिए। मैं समझता हूँ कि अनुच्छेद 70, जिसे हमने अभी पारित किया है, में एक निश्चित उपबंध है जो राष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों में अभिभाषण देने का अधिकार होता है और उसे संदेश भेजने का भी अधिकार प्राप्त है और वे संदेश किसी विधेयक विशेष से संबंधित हो सकते हैं या फिर संसद की किसी अन्य कार्यवाहियों से संबंधित हो सकते हैं। मैं नहीं समझता कि राष्ट्रपति को सभा को संबोधित किए जाने का जहाँ तक स्वतंत्र अधिकार दिए जाने का संबंध है, अनुच्छेद 70 में अन्तर्विष्ट किए गए उपबंध से और कुछ ज्यादा किए जाने की जरूरत है क्योंकि अनुच्छेद 70 में पर्याप्त रूप से इस बारे में उपबंध किया गया है। इसलिए, मेरे विचार से इस संशोधन को लाए जाने की कोई जरूरत नहीं है।
¹प्रो. के.टी. शाह द्वारा रखा गया एकमात्र संशोधन अस्वीकृत हुआ। अनुच्छेद 71 को संविधान में जोड़ा गया।ह्
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अनुच्छेद 72
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं नहीं समझता कि प्रो. शाह अनुच्छेद 72 के अन्तर्निहित प्रयोजन को वास्तव में समझ पाए हैं। इस मामले को और स्पष्ट करने हेतु मैं कुछ साधारण से मूलभूत सिद्धांतों के बारे में बताना चाहूँगा। प्रत्येक सभा एक स्वायत्तशासी सभा होती है। अर्थात् वह किसी भी ऐसे व्यक्ति, जो उस सभा का सदस्य नहीं है, को सभा की कार्यवाहियों में भाग लेने अथवा कार्यवाही समाप्त होने के बाद मतदान करने की अनुमति नहीं देगी। सभा की कार्यवाहियों में भाग लेने तथा मतदान करने का हक केवल उन्हीं व्यक्तियों को है, जो उस सभा के सदस्य हैं। अब हमारे यहाँ एक समान स्थिति बन गई है और वह इस प्रकार है। केन्द्रीय स्तर पर हमारे यहाँ दो सदन हैं, उच्च सदन और निचला सदन। यह बिल्कुल संभव है कि मंत्री के रूप में नियुक्त कोई व्यक्ति निचले सदन का सदस्य हो। यदि कोई विधेयक उसके प्रभार में है और विधेयक के लिए दोनों सभाओं की मंजूरी लेना आवश्यक है तो यह स्पष्ट है कि उस विधेयक को निचले सदन में ही नहीं, बल्कि उच्च सदन में भी प्रस्तुत करना होगा। परिणामतः यदि विधेयक का प्रभारी कोई निचले सदन का सदस्य है तो सामान्य स्थिति में वह उच्च सदन
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 19 मई, 1949, पृ. 113-114