15
में उपस्थित होने तथा विधेयक प्रस्तुत करने की स्थिति में नहीं होगा, जब तक कि इसके लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं बना दिया जाता। ऐसा उस व्यक्ति, जो निचले सदन का सदस्य है और जो किसी विधेयक का एक प्रभारी मंत्री है, को उच्च सदन में प्रवेश करने, उसे संबोधित करने, उसकी कार्यवाहियों में भाग लेने के लिए समर्थ बनाने हेतु अनुच्छेद 72 अधिनियमित किया जा रहा है। अनुच्छेद 72 वास्तव में समान्य नियम कि कोई भी व्यक्ति, जो उस सभा का सदस्य न हो, सभा की कार्यवाहियों में भाग नहीं ले सकता, का एक अपवाद है। यह अनिवार्य है कि कोई मंत्री जो उच्च सदन का सदस्य हो, को निचले सदन में प्रवेश करने ओर उसे संबोधित करने का अधिकार होना चाहिए ताकि यह सब कामकाज पूरा हो सके। उसी प्रकार यदि वह निचले सदन का सदस्य है, तो उसे उच्च सदन में उपस्थित होने, उसे संबोधित करने और उसमें भाग लेने का अधिकार होना चाहिए। इन्हीं सब स्थितियों को दृष्टि में रखकर अनुच्छेद 72 अधिनियमित किया जा रहा है। यही नियम महान्यायवादी के मामले में भी लागू होता है। महान्यायवादी निचले सदन का सदस्य हो सकता है। उसे उच्च सदन में जाना पड़ सकता है, लेकिन निचले सदन का सदस्य होने के कारण ही उसे उच्च सदन में उपस्थित होने का वैधानिक अधिकार नहीं मिल जाता। परिणामतः यह प्रावधान किया गया है। उसी प्रकार से यदि वह उच्च सदन का सदस्य है तो उसे निचले सदन में प्रवेश करने और उसे संबोधित करने का वैधानिक अधिकार नहीं होता। इसी प्रयोजनार्थ इस अनुच्छेद को अधिनियमित किया गया है। हमने इस अधिकार को केवल कार्यवाहियों में भाग लेने तक सीमित रखा है। इसके द्वारा हम किसी मंत्री को, जो दूसरे सदन की कार्यवाहियों में भाग ले रहा हो, को मतदान करने का अधिकार नहीं देते क्योंकि हम नहीं समझते कि किसी विधेयक के मामले में कार्यवाहियों में हिस्सा के लिए उसे मतदान करने की शक्ति दिया जाना अनिवार्य है। मैं समझता हूँ कि मेरे मित्र ने यह भी कहा है कि ‘मंत्री’ शब्द का विलोप कर दिया जाना चाहिए और ‘निर्वाचित व्यक्ति’ शब्द अन्तर्विष्ट किए जाने चाहिए_ लेकिन, उस मामले में फिर एक कठिनाई उत्पन्न हो सकती है क्योंकि हमने अपने संविधान के किसी भाग में यह कहा है कि कोई व्यक्ति, जो किसी सदन का निर्वाचित सदस्य नहीं है, को कतिपय अवधि के लिए मंत्री के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। ऐसे व्यक्ति को भी वह सब अधिकार प्रदान करने हेतु ‘मंत्री’ शब्द का प्रयोग किया जाना आवश्यक है न कि ‘व्यक्ति’ शब्द। इसी कारण से इस संदर्भ में ‘मंत्री’ शब्द अति अनिवार्य है। मैं संशोधन का विरोध करता हूँ।
¹प्रो. के.टी. शाह का संशोधन अस्वीकृत हुआ और अनुच्छेद 72 को संविधान में जोड़ा गया।ह्
* * * * *
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 19 मई, 1949, पृ. 119