16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अनुच्छेद 73
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बॉम्बे जनरल)ः सभापति महोदय, मैं यह कहने से अपने आपको रोक नहीं पा रहा हूँ कि श्री नजरुद्दीन अहमद द्वारा प्रस्तुत संशोधन बिल्कुल ही बेतुका है और खण्ड में उल्लिखित उपबंधों के विपरीत पूरी तरह से मिथ्या धारणा पर आधारित है। ऐसा प्रतीत होता है कि वह किसी व्यक्ति के उसी पद पर पुनः निर्वाचित होने तथा नवनिर्वाचन के बीच के अंतर को नहीं समझ पा रहे हैं। अनुच्छेद 73 पुनर्निर्वाचन से संबंधित है न कि नवनिर्वाचन से। नवनिर्वाचन अनुच्छेद 74 में उल्लिखित परिस्थितियों के कारण रिक्त हुए पद के परिणामस्वरूप किया जाता है। अनुच्छेद 74 में दिए गए कारण के आधार पर वह व्यक्ति सदन का सदस्य नहीं रह जाता है और स्पष्ट है कि उस व्यक्ति के सदन का सदस्य नहीं रहने पर आप यह नहीं कह सकते कि वे लोग ‘एक सदस्य को निर्वाचित कर सकते हैं’ जिसका आशय यह हो सकता है कि उसी व्यक्ति जिसने पहले वह पद धारित किया हुआ था, उसे ही निर्वाचित किया गया है। परिणामतः, इस स्थिति को पूरा करने हेतु, समुचित शब्द विन्यास ‘अन्य सदस्य’ है क्योंकि वह सदस्य अनुच्छेद 74 के अन्तर्गत अयोग्य हो चुका है। इसलिए अनुच्छेद 73 में प्रयुक्त किए गए शब्द बिल्कुल सही क्रम में हैं। मैं यह कह सकता हूँ कि यदि कोई सदस्य समयावधि समाप्त हो जाने के कारण सदस्य नहीं रह जाता है, तो उसे पुनः निर्वाचित किया जाता है क्योंकि वह ‘अन्य सदस्य’ है।
¹श्री नजरुद्दीन का संशोधन अस्वीकृत हुआ। अनुच्छेद 73 को संविधान में जोड़ा गया।ह्
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नया अनुच्छेद 75-क
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः माननीय सभापति, ऐसी कोई भी कठिनाई उत्पन्न होने की संभावना नहीं है जैसा कि श्री कामथ ने बताया है और मैं यह कहना चाहता हूँ कि इसमें किसी प्रकार की कोई त्रुटि नहीं है। स्थिति इस प्रकार होगीः यदि सभापति पर लगाए गए अभियोग के मामले में सुनवाई चल रही हो तो मैं - यहाँ लोकप्रिय शब्द प्रयोग कर हरा हूँ - यद्यपि सभापति उपस्थित रहेगा, फिर भी उपसभापति सभा की अध्यक्षता करेगा। यदि उपसभापति के मामले में सुनवाई हो रही हो तो सभापति सभा की अध्यक्षता करेगा_ और जब यदि विधानमंडलों की किसी भी बैठक में, जब राष्ट्रपति उसे उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है, तो अध्यक्ष अथवा
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 19 मई, 1949, पृ. 121