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18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुच्छेद 77

** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मुझे खेद है कि मैं अपने माननीय मित्र, श्री कामत द्वारा प्रस्तुत संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता। विद्यमान अनुच्छेद एक अति सरल सिद्धांत पर आधारित है और वह यह है कि कोई व्यक्ति सामान्य तौर पर अपना त्यागपत्र उसी व्यक्ति को सौंपता है जिसने उसे नियुक्त किया हो। अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वैसे व्यक्ति होते हैं जिन्हें संसद द्वारा नियुक्त किया जाता है या चुना जाता है या निर्वाचित किया जाता है। परिणामतः इन दोनों व्यक्तियों यदि वे लोगों अपना त्यागपत्र देना चाहते हों, को अपने त्यागपत्र सभा को सौंपने चाहिए जो कि उन लोगोंके नियुक्त प्राधिकारी हैं। निःसंदेह सभा लोगों का एक सामूहिक निकाय है इसलिए त्यागपत्र सभा के प्रत्येक सदस्य के नाम से अलग-अलग संबोधित नहीं किया जा सकता। इसके परिण् ामस्वरूप यह उपबंध किया जाता है कि त्यागपत्र या तो अध्यक्ष के नाम या उपाध्यक्ष के नाम संबोधित होना चाहिए क्योंकि यही दोनों लोग सभा का प्रतिनिधित्व करते हैं। वास्तविक तौर पर देखें तो सिद्धांततः त्यागपत्र सभा को सौंपा जाता है क्योंकि सभा ने ही उन दोनों की नियुक्ति की हुई होती है। उन दोनों की नियुक्ति राष्ट्रपति ने नहीं की हुई होती। परिणामतः यह एक बड़ी असंगतिपूर्ण स्थिति होगी यदि उपाध्यक्ष अथवा अध्यक्ष को अपने त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंपने पड़ें जिसे सभा से कुछ लेना-देना नहीं होता और उसे इस मामले में सभा से कुछ लेना-देना ही नहीं होना चाहिए जहां सभा को कार्यपालिका प्राधिकार जिसका उपयोग राष्ट्रपति या तत्कालीन सरकार के माध्यम से किया जाता है, से स्वतंत्र रखा जाना चाहिए।

श्री एच.वी. कामतः एक सूचना के आधार पर क्या मैं डॉ. अम्बेडकर से यह जान सकता हूँ कि आज केन्द्रीय विधानसभा के अध्यक्ष के मामले में क्या प्रक्रिया व्याप्त है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः आज की स्थिति इतनी अलग है क्या वह वर्तमान स्थिति के बारे में जानना चाहते हैं अथवा वह उस स्थिति के बारे में जानना चाहते हैं जो वह पैदा करना चाहते हैं? भारत सरकार अधिनियम के अधीन, असेम्बली और अध्यक्ष गवर्नर जनरल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। परिणामतः अध्यक्ष को गवर्नर जनरल के नाम पर त्यागपत्र संबोधित करना होता है। हम नहीं चाहते कि वह स्थिति जारी रहे। हम लोग अध्यक्ष को कार्यपालिका से यथासंभव पूरी तरह से स्वतंत्र स्थिति प्रदान करना चाहते हैं।

** सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 19 मई, 1949, पृ. 121 ख्.,

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