नया अनुच्छेद 80 - Page 39

20 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः क्या मैं यह बता सकता हूँ कि सभा अनुच्छेद 68-क को पहले ही स्वीकार कर चुकी है जोकि बिल्कुल वही है जिसे अभी श्री कामत ने संशोधन के रूप में प्रस्तुत किया है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः कल हम अनुच्छेद 68-क स्वीकार कर चुके हैं जिसमें इस मुद्दे को शामिल कर लिया गया है।

माननीय सभापतिः वह अनुच्छेद 1538 और 1541 के पहले भाग के बारे में बता रहे हैं।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः मुझे खेद है।

माननीय श्री के. संथानमः मेरा सुझाव है कि श्री कामथ उन्हें अलग से प्रस्तुत कर सकते हैं। यह हो सकता है कि हम लोग एक का समर्थन करना चाहें और दूसरे का विरोध करना चाहें।

श्री एच.वी. कामतः 1538 और 1541 एक साथ रखे जाएंगे_ अन्यथा तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो पाएगी। यदि मेरे संशोधन स्वीकृत हो जाते हैं तो अनुच्छेद को इस प्रकार पढ़ा जाएगा -

फ्इस संविधान में यथा अन्यथा उपबंधित के सिवाए, प्रत्येक सदन की बैठक में या सदनों की संयुक्त बैठक में सभी प्रश्नों का अवधारण उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से किया जाएगाः

‘सभापति या अध्यक्ष आदि को छोड़कर’

* * * * *

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मुझे खेद है कि मैं श्री कामथ का संशोधन स्वीकार नहीं कर सकता।

श्री एच.वी. कामतः मेरा कौन सा संशोधन? मैंने अलग-अलग तीन संशोधन उपस्थित किए हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह संशोधन जिसे उन्होंने अभी-अभी रखा है। मैंने एक पुस्तक में यह पाया है कि यह एक समेकित संशोधन है। उन्होंने इसके अलग-अलग भागों पर बोला होगा लेकिन संशोधन एक ही है।

श्री एच.वी. कामतः महोदय, मैंने उन्हें अलग-अलग भेजा था और मैंने उन पर पृथक रूप से बोला है। महोदय आपकी अनुमति से पहले उसके बारे में बताना चाहूँगा।

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 19 मई, 1949, पृ. 128-29