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‘किसी बैठक में’ शब्दों के बाद ‘कोई भी सभा जाए’_ दूसरा ‘सभापति या अध्यक्ष या उसके रूप में कार्य कर रहे व्यक्ति के अलावा’ शब्दों का विलोप किया जाए। तीसरा, दूसरे पैरा के शुरुआत में ‘बशर्ते कि’ शब्द अन्तःस्थापित किया जाए’। मैं यह जानना चाहता हूँ कि इन तीनों संशोधनों में कौन सा संशोधन माननीय सदस्य स्वीकार कर रहे हैं, क्या वह सभी तीनों संशोधन या दो संशोधन या एक संशोधन को स्वीकार कर रहे हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं माननीय सदस्य के संशोधन संख्या 1538 का उल्लेख कर रहा हूँ, जो कि आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, एक ही संशोधन प्रतीत होता है।
श्री एच.वी. कामतः महोदय, मैंने आपसे उन्हें अलग-अलग प्रस्तुत करने की अनुमति मांगी थी।
माननीय सभापतिः श्री कामत ने ये तीन संशोधन प्रस्तुत किए हैं लेकिन, उन्हें अलग-अलग भी लिया जा सकता है। संशोधित हो जाने पर, अनुच्छेद को इस प्रकार से पढ़ा जाएगा।ः
फ्इस संविधान में यथा अन्यथा उपबंधित के सिवाए प्रत्येक सदन की बैठक में या सदनों की संयुक्त बैठक में ......य्
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे लगता है कि मैं संशोधनों की समेकित सूची में से संशोधन संख्या 87 को स्वीकार कर सकता हूँ। इससे मेरे उद्देश्य की पूर्ति होती है और इसलिए मैं इसे स्वीकार करता हूँ।
(अनुच्छेद 80 को यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया।)
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अनुच्छेद 81
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि अनुच्छेद 81 में ‘घोषणा’ शब्द के स्थान पर ‘प्रतिज्ञान अथवा शपथ’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएं।य्
श्री एच.वी. कामतः सभापति महोदय, मैं अपने माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर द्वारा अभी प्रस्तुत किए गए संशोधन संख्या 1554 के बारे में छोटा सा स्पष्टीकरण चाहता हूँ, जिसमें फ्घोषणाय् शब्द के स्थान पर फ्प्रतिज्ञान अथवा शपथय् शब्दों को प्रतिस्थापित करने की बात कही गई है। महोदय, क्या मैं आपका ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 19 मई, 1949, पृ. 130-32