अनुच्छेद 81 - Page 41

22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कर सकता हूँ कि सभा पहले ही अनुच्डेद 49 स्वीकार कर चुकी है जिसमें राष्ट्रपति या राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रहे व्यक्ति अथवा राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन करने वाले व्यक्ति द्वारा कार्यभार संभालने से पूर्व एक प्रतिज्ञान अथवा शपथ ली जाएगी। उसमें उल्लिखित प्रतिज्ञान अथवा शपथ को इस आशय से संशोधित किया गया था कि राष्ट्रपति या राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रहा व्यक्ति या राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन कर रहे व्यक्ति को अपना कार्यभार संभालने से पूर्व निम्न रूप में शपथ या प्रतिज्ञान लेना चाहिएः

फ्मैं क, ख, ईश्वर के नाम पर शपथ लेता हूँ या फ्मैं क, ख, यह प्रतिज्ञान करता हूँय्......

क्या मैं अपने माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर के साथ-साथ इस सभा से यह आश्वासन प्राप्त कर सकता हूँ कि अनुच्छेद 81 में उल्लिखित प्रतिज्ञान अथवा शपथ के बारे में उपबंध उसी तर्ज पर किया जाएगा जैसा कि संविधान के संशोधित अनुच्छेद 49 के मामले में किया गया था।

माननीय सभापतिः मैं समझता हूँ कि यह स्पष्ट है कि इस अनुसूची को भी संशोधित करना होगा ताकि इस खण्ड के शब्दों के साथ उसका मेल हो सके...

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे खेद है कि मैं अपने मित्र प्रो. शाह द्वारा प्रस्तुत संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता। मेरे विचार से प्रो. शाह वास्तव में इन स्थितियों के क्रम को नहीं समझ पा रहे हैं। यदि मैं ऐसा कहूँ कि किसी उम्मीदवार जिसे तब तक के लिए निर्वाचित किया जाता है जब तक कि वह अपने जीवन में सभा का सदस्य नहीं बन जाता। यदि प्रो. शाह अनुच्छेद 81 का संदर्भ लें और उसके शीर्षक को नोट करें फ्सदस्यों को अयोग्य ठहराया जानाय् तो वह सबसे पहली बात जो महसूस करेंगे वह यह होगी कि कोई उम्मीदवार संसद के लिए निर्वाचित हो जाने मात्र से ही संसद का सदस्य बनने का हकदार नहीं हो जाता। यथोचित रूप से निर्वाचित उम्मीदवार को संसद का सदस्य बनने से पूर्व कतिपय प्रकार की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ सकती हैं। ऐसी ही एक औपचारिकता उसके द्वारा शपथ लेने की हो सकती है। उसे सभा में अपना स्थान ग्रहण करने से पूर्व पहले शपथ लेनी चाहिए। जब तक वह शपथ नहीं ले लेता वह सभा का सदस्य नहीं बन जाता उसे सभा में बैठने का हक प्राप्त नहीं होता। वही उपबंध किया गया है। जब तक उम्मीदवार शपथ नहीं ले लेते और सभा के अन्दर अपना स्थान प्राप्त नहीं कर लेते वे सदस्य नहीं माने जाते और फिर उन्हें अध्यक्ष के चुनाव में भाग लेने का हक नहीं होता। इस संबंध में इस प्रकार का क्रम है - निर्वाचन, शपथ लिया जाना, सदस्य बनना और फिर अध्यक्ष को चुनने में भाग लेने का हक प्राप्त करना। इसलिए अध्यक्ष का चुनाव किए जाने से पूर्व शपथ दिलाए जाने की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए।