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इस क्रम को देखते हुए यह कहना असंभव होगा कि अध्यक्ष के सामने शपथ ली जाएगी क्योंकि अध्यक्ष तो उस समय वहां होता ही नहीं और अध्यक्ष का चुनाव तब तक नहीं हो सकता जब तक निर्वाचित सभा के सदस्य नहीं बन जाते। अतः शपथ दिलाने का अधिकार अध्यक्ष को छोड़कर किसी और व्यक्ति में अनिवार्य रूप से निहित किया जाना चाहिए। इस स्थिति में प्रश्न यह है कि शपथ दिलाने की शक्ति किसमें निहित की जाएगी? स्पष्ट है कि यह शक्ति केवल राष्ट्रपति में या फिर किसी अन्य सदस्य में जिसे राष्ट्रपति अपनी ओर से अपना प्राधिकार अन्तरित कर सके। इस क्रम के अनुसार शपथ दिलाने का प्राधिकार या तो राष्ट्रपति में या फिर उसके द्वारा नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति में निहित करने का उपबंध स्वीकार करने का विकल्प है। इस प्राधिकार को अध्यक्ष में निहित नहीं किया जा सकता क्योंकि उस समय अध्यक्ष का अस्तित्व नहीं होता।
मैं अब अपने सभापति द्वारा उठाए गए मुद्दे पर आता हूँ। शपथ लेने के संबंध में उप-चुनाव में चुने गए नवनिर्वाचित सदस्य के मामले में क्या होगा? क्या उसे राष्ट्रपति के पास जाकर शपथ लेनी पड़ेगी या फिर अध्यक्ष के सामने शपथ लेनी पड़ेगी? उस प्रश्न का उत्तर यह है कि अध्यक्ष का चुनाव हो जाने के बाद राष्ट्रपति अपनी ओर से शपथ दिलाने का प्राधिकार उसे प्रदान कर देगा ताकि जब कोई नवनिर्वाचित उम्मीदवार शपथ लेने के प्रयोजन से संसद में उपस्थित होता है तो राष्ट्रपति द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के रूप में अध्यक्ष उसे शपथ दिलाएगा। इसके परिणामस्वरूप नवनिर्वाचित व्यक्ति के मामले में उसके लिए राष्ट्रपति या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त पीठासीन प्राधिकार के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्रमबद्ध स्थिति यही है और यह देखा जा सकता है कि अनुच्छेद 81 में इस प्रकार का उपबंध किया जाए कि यह क्रम सही ढंग से लागू हो सके। आज भी मैं यह कहूँगा कि उसी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। राष्ट्रपति (या गवर्नर जनरल) सभा के प्रथम बार समवेत होने पर किसी व्यक्ति को उसकी अध्यक्षता करने के लिए नियुक्त करता है। फिर प्रत्येक सदस्य पीठासीन प्राधिकारी के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञा लेता है। सदस्यों को शपथ दिलाने के बाद पीठासीन प्राधिकारी अध्यक्ष का चुनाव संपन्न कराता है और अध्यक्ष का चुनाव हो जाने पर पीठासीन अधिकारी के रूप में चुने गए व्यक्ति का कार्य समाप्त हो जाता है और फिर अध्यक्ष उसके बाद आने वाले किसी सदस्य को शपथ दिलाने का प्राधिकार राष्ट्रपति से उस सभापीठ अधिकारी के स्थान पर प्राप्त कर लेता है। इसलिए जैसा कि मैंने कहा कि मूल प्रारूप इन क्रमवार स्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है और राष्ट्रपति के लिए यह प्राधिकार अध्यक्ष को दिए जाने हेतु इस प्रकार का उपबंध किया जा रहा है कि अध्यक्ष नवनिर्वाचित व्यक्ति को शपथ लेने हेतु राष्ट्रपति के पास जाने से रोक सकेगा।