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अनुच्छेद 82
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि अनुच्छेद 82 के खण्ड (1) के बाद, निम्नलिखित नए खंड स्थापित किए जाएंः
कोई व्यक्ति संसद और किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन, दोनों का सदस्य नहीं होगा और यदि कोई व्यक्ति संसद और ¹किसी राज्यह् के विधानमंडल के किसी सदन, दोनों का सदस्य चुन लिया जाता है तो ऐसी अवधि की समाप्ति के पश्चात् जो राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट की जाए, संसद में ऐसे व्यक्ति का स्थान रिक्त हो जाएगा यदि उसने राज्य के विधान मंडल में अपने स्थान को पहले ही नहीं त्याग दिया है।’’
महोदय, इस पर कोई टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। यह एक साधारण नियम है।
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* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं श्री नजरुद्दीन अहमद या श्री कामत में से किसी के भी संशोधनों को स्वीकार नहीं करता।
श्रीमान सभापतिः मैं संशोधनों पर एक-एक करके मत लूँगा।
¹उपर्युक्त दिए गए संशोधनों में से केवल डॉ. अम्बेडकर का संशोधन स्वीकृत हुआ। अनुच्छेद 82 यथासंशोधित रूप में संविधान में जोड़ दिया गया।ह्
अनुच्छेद 83
** माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि अनुच्छेद 83 के खण्ड (1) के उपखण्ड (छ) के स्थान पर निम्नलिखित
खण्ड प्रतिस्थापित किया जाएः
यदि वह भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित कर ली है या वह किसी विदेशी राज्य के प्रति निष्ठा या अनुषक्ति को अभिस्वीकार किए हुए हैं।य्
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*** माननीय सभापतिः मैं चाहता हूँ कि प्रारूप समिति इस मामले में एक मुद्दे पर विचार करे। यदि हम इस अनुच्छेद के खण्ड 2 का उल्लेख करें तो इसमें सभापति या उपसभापति, लोक सभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का कोई उल्लेख नहीं है। वे लोग भी लाभ के पद पर होते हैं। उन लोगों को भी वेतन मिलता है।
* वही, 136
** सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 19 मई, 1949, पृ. 138
*** वही, पृष्ठ 141