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28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुच्छेद 88

** माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 88 के खण्ड (2) में ‘दोनों सदन हैं’ शब्दों के स्थान पर उस खण्ड के उपखण्ड (ग) में उल्लिखित सदन हैय् शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँ।

महोदय, यह उपखण्ड (ग) में उल्लिखित सदन के बारे में स्पष्टीकरण दिए जाने का मामला भर है।

माननीय सभापतिः संशोधन संख्या 1651 मैं समझता हूँ कि वह भी इसमें शामिल हो चुका है।

(संशोधन संख्या 1652 प्रस्तुत नहीं किया गया।)

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 88 के खण्ड (2) में अन्तिम शब्द ‘शब्दों’ के पहले ‘बाद के’ के शब्द अन्तःस्थापित किए जाएं।

(संशोधन संख्या 1654 प्रस्तुत नहीं किया गया।)

माननीय श्री के. संथानमः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 88 के खण्ड (4) में आए ‘कुल संख्या’ शब्दों को विलोप किया जाए।

महोदय, मैं उस परन्तुक के विलोप पर जोर नहीं देना चाहता, मैं इस आशय का संशोधन चाहता हूँ कि...

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि मेरे माननीय मित्र इस मामले को प्रारूप समिति द्वारा विचार किए जाने हेतु छोड़ दें तो मैं उनका बड़ा आभारी रहूँगा और फिर हम इस मामले को बाद में ले सकते हैं।

माननीय के. संथानमः महोदय, मुझे स्वीकार है।

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अनुच्छेद 88

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मरे मित्र श्री कामत द्वारा प्रस्तुत किए गए संशोधन के बारे में ही उत्तर दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने अपने संशोधन संख्या 1656 के माध्यम से फ्इस संविधान के प्रयोजनार्थय् शब्दों का विलोप किए जाने

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 20 मई, 1949, पृ. 183