30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
खण्ड 91
** माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि अनुच्छेद 91 के परन्तुक में ‘छह सप्ताह के बाद नहीं’ शब्दों के स्थान पर ‘जितनी जल्दी संभव हो’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएं।य्
श्री नजीरुद्दीन अहमदः इस संशोधन के लिए मेरा एक संशोधन है जिसकी संख्या 94 है।
माननीय सभापतिः मैं समझता हूँ कि यह एक प्रारूप मात्र है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः वास्तविक व्यवहार में इससे अन्तर पड़ जाएगा।
माननीय सभापतिः तो आप इसे महत्त्वपूर्ण मानते हैं?
श्री टी.टी. कृष्णामाचारीः भाषा में थोड़ी भिन्नता है। मेरे विचार से डॉ. अम्बेडकर का प्रस्ताव बेहतर रहेगा।
माननीय सभापतिः मैं इसे मतदान के लिए रखूँगा। इसे प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है। संशोधन संख्या 1689ः यह भी डॉ. अम्बेडकर के संशोधन संख्या 1688 जैसा ही है। हमने इसे उसी रूप में लिया है जिस रूप में प्रस्तुत किया गया है। क्या इसे प्रस्तुत किया जाना जरूरी है? यदि इसमें थोड़ा भी अन्तर हो तो आप इसे प्रस्तुत कर सकते हैं।
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* माननीय सभापतिः मैं अब संशोधनों पर मत लूंगा। डॉ. अम्बेडकर क्या आप कुछ कहना चाहेंगे?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं महोदय, मेरे विचार से इस पर कोई जवाब आवश्यक नहीं है।
नजरुद्दीन अहमद का संशोधन अस्वीकृत हुआ।
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माननीय सभापतिः मैं अब संशोधनों पर मत लूँगा। डॉ. अम्बेडकर, क्या आप कुछ कहना चाहते हैं?
¹डॉ. अम्बेडकर के संशोधन स्वीकृत हुए। अन्य संशोधन अस्वीकृत हुए। अनुच्छेद 91, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया।ह्
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** वही, पृष्ठ 192
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 20 मई, 1949, पृ. 195