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अनुच्छेद 67-क
** माननीय सभापतिः हम अनुच्छेद 67-क पर विचार करेंगे जिसे उस दिन लिया गया था और जो स्थगित कर दिया गया था।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बई-जनरल)ः महोदय, मैं सभा से इस अनुच्छेद को वापस लेने की अनुमति चाहता हूँ।
माननीय सभापतिः मैं समझता हूँ कि उन्होंने जब इसे प्रस्तुत किया ही नहीं, तो फिर इसे वापस लेने का प्रश्न ही नहीं उठता।
श्री बी. पोकर साहिब (मद्रासः मुस्लिम)ः नहीं, इसे प्रस्तुत किया जा चुका है और यह सभा के स्वामित्व में है। इसलिए, माननीय सदस्य को इसे वापस लेने का कारण बताना चाहिए।
माननीय सभापतिः जी हाँ, मुझे खेद है कि मुझसे गलती हो गई। माननीय डॉ. अम्बेडकर इस अनुच्छेद को वापस लिए जाने का कारण बताएंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय इसका कारण यह है जैसा कि मैं पिछली बार बता चुका हूँ कि हमने संसद में कतिपय व्यक्तियों को नाम-निर्देशित किए जाने का उपबंध किया है। मूल प्रस्ताव में 15 व्यक्तियों के नाम-निर्देशित किए जाने का प्रावधान था, बाद में यह निर्णय लिया गया कि इन 15 व्यक्तियों को दो श्रेणियों में विभाजित कर दिया जाए, अर्थात् 12 व्यक्ति साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सेवा आदि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले हों और 3 व्यक्ति किसी विधेयक विशेष के संबंध में संसद की सभाओं की सहायता करने तथा परामर्श देने हेतु नाम-निर्देशित किए जाएं। महोदय, मेरा यह मानना है कि अनुच्छेद 67, जो राष्ट्रपति को संसद में 12 व्यक्तियों को नाम-निर्देशित किए जाने की अनुमति देता है, में ऐसा उपबंध पहले से ही अन्तर्विष्ट है और उससे ही इस नए अनुच्छेद 67 (क) में किए जाने वाले उपबंध का प्रयोजन पूरा हो जाएगा। अनुच्छेद 67 (क) के कानून के रूप में पारित हो जाने पर उसके माध्यम से नाम-निर्देशित किए जाने वाले व्यक्ति, जो सेवा प्रदान करेंगे, वही सेवा अनुच्छेद 67 के अधीन नाम-निर्देशित किए गए व्यक्तियों द्वारा भी प्रदान किया जा सकेगा, और इसलिए अनुच्छेद 67 (क) के अधीन नाम-निर्देशित किया जाना अनुच्छेद 67 में शामिल नाम-निर्देशित किए जाने की प्रणाली की नकल भर होगी। इसके अलावा, यह भी महसूस किया जा रहा है कि एक स्वतंत्र संसद, जो कि पूरी तरह से सम्प्रभु है और वह लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, के अन्दर नाम-निर्देशित किए जाने वाले प्रावधानों
** ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 20 मई, 1949, पृ. 197