अनुच्छेद 92 से 99 के संबंध में वक्तव्य - Page 51

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की अधिकता नहीं होनी चाहिए। हमारे यहां पहले से ही 12 नाम-निर्देश्ति सदस्यों का प्रावधान है_ एंग्लो-इंडियन के बारे में भी कुछ नाम-निर्देशित किए जाने का प्रावधान किया जा सकता है और इसलिए, यह माना जाता है कि नाम-निर्देशित सदस्यों की संख्या बढ़ाते चले जाना संसद के लोकप्रिय तथा प्रतिनिधिमूलक चरित्र का अपमान करने जैसा होगा। इसलिए, मैं अनुच्छेद 67 (क) को वापस लेना चाहता हूँ।

सभा की स्वीकृति से अनुच्छेद 67-क वापस लिया गया।

अनुच्छेद 92 से 99 के संबंध में वक्तव्य

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ कि अब हम अनुच्छेद 100 से शुरुआत करें।

माननीय सभापतिः मैं समझता हूँ कि इस समय अनुच्छेद 92 से 99 पर चर्चा स्थगित कर दी जानी चाहिए ताकि वित्त और वित्त विधेयकों से संबंधित कार्य को पूरा किया जा सके और उन पर आगे और चर्चा की जा सके।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ, स्थिति इस प्रकार है। जब अनुच्छेद 90 पर बहस चल रही थी, उस समय मैंने सुझाव दिया था कि बहस पर चर्चा पूरी नहीं की जाए और उस पर मत न लिया जाए क्योंकि उस समय मुझे लगा था कि उस अनुच्छेद में कुछ त्रुटि है, जिसे मेरे विचार से सही किया जाना चाहिए था और अब यदि उस त्रुटि को सही किया जाना है तो अनुच्छेद 96 से 99 पर उस अनुच्छेद के अनुसरण में फिर से विचार किए जाने की जरूरत है। अनुच्छेद 91 हम पारित कर चुके हैं। अनुच्छेद 92 से 99 पर आगे और विचार किए जाने की आवश्यकता है और इसलिए मैं चाहता हूँ कि वर्तमान में उन अनुच्छेदों पर चर्चा स्थगित कर दी जानी चाहिए। लेकिन हम अनुच्छेद 100 से कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।

¹अनुच्छेद 100 स्वीकृत हुआ और डॉ. अम्बेडकर द्वारा दिए गए सुझाव के अनुरूप उसे संविधान में जोड़ दिया गया।ह्

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अनुच्छेद 101

# माननीय डॅ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, जहाँ तक श्री कामत के संशोधन का प्रश्न है, मुझे नहीं लगता कि यह जरूरी है, क्योंकि संसद की कार्यवाहियों के बारे में न्यायालय

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 23 मई, 1949, पृ. 197-98

# ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 23 मई, 1949, पृ. 200-01