34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ‘अधिकारी’ तो वहाँ होंगे।
श्री एच.वी. कामतः क्या मैं कुछ स्पष्टीकरण माँग सकता हूँ? श्री संथानम ने मेरे संशोधन के बारे में उल्लेख करते हुए कहा था कि किसी संशोधन की वैधता के बारे में केवल विधि न्यायालय में ही नहीं, बल्कि किसी विधानमण्डल में भी, प्रश्न उठाया जा सकता है। क्या डॉ. अम्बेडकर उनकी बात से सहमत हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं अपने द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण के लिए ही जिम्मेदार हूँ।
श्री एच.वी. कामतः डॉ. अम्बेडकर ने जो अभी कहा है कि मार्जिनल उपशीर्षक स्पष्ट है। क्या मैं अन्य फोरम अर्थात् विधानसभा का उल्लेख कर सकता हूँ? मुझे यह बताया गया है कि मार्जिनल शीर्षकों का इस प्रकार के विधान से कुछ भी लेना-देना नहीं है और अनुच्छेदों या धाराओं का उपयोग बिना मार्जिनल शीर्षकों का उल्लेख किए बगैर ही किया जाता है। यदि ऐसा है तो आप मार्जिनल शीर्षक तथा अनुच्छेद को एक साथ नहीं पढ़ते हैं। इसलिए, इसका अर्थ मुझे स्पष्ट नहीं हो रहा है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उस बारे में दो विचार हैं। एक विचार तो यह है कि मार्जिनल नोट धारा का भाग नहीं होता और दूसरा विचार यह है कि वह धारा का भाग होता हैः उदाहरण के लिए श्री मावलंकर, जब वह बम्बई में थे, ने यह मत प्रकट किया था कि मार्जिनल नोट धारा का भाग नहीं है। लेकिन बम्बई विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष ने हाल ही में कहा है कि मार्जिनल नोट धारा का ही भाग होता है और उससे धारा का अर्थ स्पष्ट होने में मदद मिलती है।
¹दो संशोधन अस्वीकृत हुए। अनुच्छेद 101 संविधान में जोड़ा गया।ह्
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अनुच्छेद 102
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः माननीय सभापति माहेदय, मेरे मित्र पं. कुंजरू ने इस अनुच्छेद 102 में अन्तर्विष्ट उपबंधों के संबंध में कुछ मौलिक आपत्तियां उठाई हैं। उन्होंने अपने भाषण में कहा है कि हम लोग वस्तुतः भारत सरकार अधिनियम 1935, जिसकी इस देश के सभी दलों ने भर्त्सना की थी, में अन्तर्विष्ट उपबंधों को ही दुबारा से प्रस्तुत कर रहे हैं। मुझे लगता है कि मेरे मित्र पं. कुंजरू ने इस बात का ध्यान नहीं रखा है कि भारत सरकार अधिनियम, 1935 में दो अलग-अलग उपबंध हैं। उपबंधों का एक सेट भारत सरकार अधिनियम की धारा 42 में अन्तर्विष्ट है और दूसरा सेट धारा 43
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 23 मई, 1949, पृ. 213-17