अनुच्छेद 102 - Page 56

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हां, उस शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है क्योंकि कानून पारित करने के लिए आवश्यक ढांचा उस समय सामान्य प्रक्रिया में विद्यमान नहीं होता।

श्री एच.वी. कामतः मैं तो यह कहूँगा कि यह स्थिति शर्मनाक होगी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अब, मैं अपने मित्र श्री कुंजरू द्वारा संशोधन संख्या 1802 में उठाए गए दूसरे प्रश्न पर आता हूँ। उनका सुझाव है कि अनुच्छेद 102 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा अधिनियमित किया गया ऐसा कोई भी कानून अध्यादेश प्रख्यापित होने के 30 दिनों के बाद स्वतः ही समाप्त हो जाना चाहिए। प्रारूप अनुच्छेद में अन्तर्विष्ट उपबंध यह है कि यह कानून संसद की बैठक के बाद 6 सप्ताह तक जारी रहेगा। अब पं. कुंजरू ने अपने संशोधन लाने का जो कारण दिया है वह यह है_ वह कहते हैं कि प्रारूप अनुच्छेद में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अधीन 6 सप्ताह से अधिक की अवधि ली जा सकती है क्योंकि वह ऐसा सोचते हैं कि कार्यपालिका संसद को आहूत करने में एक महीने या दो महीने का समय ले सकती है। यदि संसद का सत्र चार महीने के बाद बुलाया जाता है, तो फिर 6 सप्ताह का समय भी रहना चाहिए क्योंकि यह व्यावहारिक होगा या इससे भी लम्बा समय रखा जा सकता है, यदि कार्यपालिका संसद को आहूत करने में विलम्ब करती है। ठीक है, हालांकि मैं नहीं जानता कि वास्तव में क्या होगा, लेकिन मेरा यह कहना है कि मेरे माननीय मित्र पं. कुंजरू ने जो आशंका व्यक्त की है, वह वास्तव में निराधार है क्योंकि हमने एक दूसरे अनुच्छेद 69 का उपबंध किया है, जिसमें कहा गया है कि संसद के दो सत्रों के बीच की अवधि 6 महीने से अधिक की नहीं होगी और मेरा विश्वास है कि संसदीय कार्य की तात्कालिकता को देखते हुए संसद के सत्र कहीं अधिक जल्दी-जल्दी बुलाए जाएंगे, जितने कि माननीय सदस्यगण वर्तमान में सोच रहे हैं। इसलिए, मेरा यह कहना है कि अनुच्छेद 69 को देखते हुए, कार्य की तात्कालिकता को देखते हुए और विद्यमान सरकार द्वारा संसद का विश्वास बनाए रखने की अनिवार्यता को देखते हुए कार्यपालिका द्वारा ऐसी किसी भी विलम्बकारी प्रक्रिया की अनुमति दी जा सकेगी, जिससे अनुच्छेद 102 के अधीन प्रख्यापित किसी अध्यादेश को लम्बे समय तक लागू करने की अनुमति दी जा सकेगी और इसलिए मैं समझता हूँ कि प्रारूप अनुच्छेद के विद्यमान उपबंधों को बनाए रखे जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।

श्री एच.वी. कामतः सभापति महोदय, क्या मैं अंतिम प्रश्न पूछ सकता हूँ? क्या यह स्वतंत्रता और लोकतंत्र के प्रति हमारे विचारों या अवधारणाओं के विपरीत नहीं होगा और जैसा कि मैं मानता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर भी नहीं चाहेंगे कि इस अनुच्छेद में अध्यादेश को लम्बे समय तक बनाए रखने की अनुमति दी जाए।