अनुच्छेद 102 - Page 58

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लिए बाध्य है। क्या संविधान में कोई अन्य और उपबंध हैं? हम लोग उस पर महाभियोग भी लगाने की स्थिति में नहीं होंगे क्योंकि यदि कोई उपबंध ही नहीं होगा, तो उसका कोई भी कृत्य संविधान का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं आपका ध्यान अनुच्छेद 61 की ओर खींचना चाहता हूँ, जिसमें राष्ट्रपति के कार्यों के बारे में बताया गया है। वह कोई भी कार्य अपने कृत्यों के उपयोग के अन्तर्गत तब तक नहीं कर सकता, जब तक उसे ऐसा करने की सलाह न दी गई हो। यह केवल ‘सहायता देने और सलाह करने’ तक ही सीमित नहीं है। ‘अपने कृत्यों के निर्वहन के मामले में’ वे शब्द अति महत्त्वपूर्ण हैं।

माननीय सभापतिः मुझे तो शंका है कि यह शब्द राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी हो सकेगा। इसमें केवल यह कहा गया है कि राष्ट्रपति के कृत्यों का प्रयोग किए जाने के लिए उसे सहायता करने और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद् होगी, जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा। इसमें यह नहीं कहा गया है कि राष्ट्रपति उस सलाह को स्वीकार करने के लिए बाध्य होगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि, वह विद्यमान मंत्रालय की सलाह स्वीकार नहीं करता तो उसे सलाह प्राप्त करने के लिए कोई और मंत्रिपरिषद् ढूंढना पड़ेगा। वह मंत्रियों से स्वतंत्र होकर कार्य करने मेंं कभी समर्थ नहीं होगा।

माननीय सभापतिः क्या किसी स्थान पर ऐसा उपबंध करने में वास्तव में कोई कठिनाई है कि राष्ट्रपति मंत्रियों की सलाह मानने के लिए बाध्य होगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हम वैसा कर रहे हैं। यदि मैं यह कहूँ कि ऐसा एक उपबंध अनुदेश में दिया गया है।

माननीय सभापतिः मैंने उस पर भी विचार किया है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः पैरा 3 में कहा गया हैः संघ की कार्यपालिका शक्ति के दायरे के अन्दर सभी मामलों में राष्ट्रपति अपनी प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के मामले में अपने मंत्रियों की सलाह पर कार्य करेगा। हम उसमें कुछ संशोधन करने का प्रस्ताव करते हैं।

माननीय सभापतिः आप उसे बदलना चाहते हैं। विद्यमान उपबंध यह कहता है कि राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्तियों के प्रयोग करने के मामले में मंत्रियों द्वारा दिशा-निर्देशित होगा और ऐसा उसकी विधायी शक्ति के मामले में नहीं है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अनुच्छेद 61 के अधिकतर उपबंध अन्य संविधानों से अक्षरशः लिए गए हैं और राष्ट्रपतियों ने हमेशा इस बात का ध्यान रखा है कि उसमें प्रयुक्त भाषा का अर्थ यह है कि उन्हें सलाह माननी चाहिए। यदि कोई दिक्कत होगी,