अनुच्छेद 102 - क - Page 59

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

तो निश्चय ही उसे उपयुक्त संशोधन द्वारा सही कर लिया जाएगा।

श्री एच.वी. कामतः किसी अध्यादेश के प्रचालन की अधिकतम अवधि के विषय पर आप इस अनुच्छेद को मौन रखने जा रहे हैं, वह अवधि साढ़े सात महीनों की हो सकती है। ऐसा होना असम्भव है।

माननीय सभापतिः क्या श्री कामत अपने संशोधन पर दूसरा भाषण देने जा रहे हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हमारे राष्ट्रपति की स्थिति संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति से बिल्कुल अलग है।

¹सभी 6 संशोधन अस्वीकृत हुए। अनुच्छेद 102 संविधान में जोड़ा गया।ह्

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि भाग 5 के अध्याय 4 के शीर्षक में आए ‘संघीय न्यायाधिकार’ शब्दों के स्थान पर ‘संघीय न्यायपालिका’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएं।

ऐसा पूर्व के अनुच्छेद, जिसमें भारत को संघ के रूप में वर्णित किया गया है, के परिणामस्वरूप करना पड़ रहा है।

संशोधन स्वीकृत हुआ।

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अनुच्छेद 102 - क

माननीय सभापतिः रात के आठ बज चुके हैं। मेरे विचार से अब चर्चा बंद कर देना बेहतर रहेगा।

श्री ब्रजेश्वर प्रसादः (बिहारः जनरल)ः मैं इस प्रस्ताव पर बोलने के लिए सभा का एक मिनट लेना चाहता हूँ।

माननीय सभापतिः मैं समझता हूँ कि सभा अब आगे कोई भी भाषण सुनने की इच्छुक नहीं है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं नहीं समझता कि इसका कोई उत्तर दिया जाना आवश्यक है। यदि मैं ऐसा कहूँ कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रो. शाह ने यह संशोधन प्रस्तुत किया है। जब हम लोग राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों पर चर्चा कर रहे थे उस समय इस मामले पर व्यापक रूप से चर्चा की गई थी। इसलिए मैं नहीं समझता कि इस मामले को दुबारा से उठाया जाए, इसलिए इस पर किसी प्रकार की बहस होनी चाहिए। इस मुद्दे पर व्यवहारिक तौर पर अनुच्छेद 39-क के अंतर्गत समाप्त कर दिया गया था।

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 23 मई, 1949, पृ. 218