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अनुच्छेद 103-क

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं यथासंभव कम से कम शब्दों में इस मामले को समाप्त करना चाहूँगा। इसे मैं समाप्त करूँ इससे पहले मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि इस विशेष संशोधन को लाने के पीछे क्या विचार है। इस संशोधन को प्रस्तुत किए जाने के पीछे जो मुख्य विचार है उसे समझने के लिए मुझे लगता है कि हमें तीन अलग-अलग मामलों को लेना होगा। एक मामला तो उच्चतम न्यायालय के उस न्यायाधीश का है जिसे किसी कार्यपालिका के पद पर नियुक्त किया गया है और जिसे उच्चतम न्यायालय में वापस आने का अधिकार नहीं दिया गया हो। एक तो वह मामला है। दूसरा मामला उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उस व्यक्ति को नियुक्त किए जाने का है जिसने कार्यपालिका का गैर-न्यायिक स्वरूप वाला कोई पद धारण किया हो। तीसरा मामला उच्चतम न्यायालय के उस न्यायाधीश का है जिसे गैर-न्यायिक स्वरूप वाला कोई कार्य सौंपा गया हो लेकिन उसे उच्चतम न्यायालय में फिर वापस आने का अधिकार भी दिया गया हो। मैं समझता हूँ कि - मेरे मित्र डॉ. सेन मुझे सही कह देंगे यदि मैं गलत कह रहा हूँ - यह संशोधन तीसरी स्थिति अर्थात् अल्प अवधि के लिए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को गैर-न्यायिक कार्य सौंपा जाता है लेकिन उसे उच्चतम न्यायालय में वापस आने का अधिकार दिया जाता है।

पहला मामला जिसका मैंने उल्लेख किया है अर्थात् उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को कार्यपालिका के अधीन किसी पद पर नियुक्त किए जाने का जहाँ तक संबंध है, यदि उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद से त्यागपत्र देता है तो मुझे इसमें कोई आपत्ति बिल्कुल नहीं दिखती क्योंकि वह पूरी तरह से उच्चतम न्यायालय के दायरे से बाहर निकल जाता है।

दूसरे मामले का जहाँ तक संबंध है अर्थात् उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश जो सेवानिवृत्त हो चुका हो, को यदि कोई कार्य सौंपा जाता है, तो उस मामले में भी कोई सीमा नहीं होनी चाहिए।

तीसरे मामले के संबंध में, मेरा यह मानना है कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर विचार किए जाने की जरूरत है। इस देश में हमारे सामने दो ऐसे मामले आ चुके हैं। एक मामला तो युद्ध के दौरान सामने आया था जब फैडरल न्यायालय के एक न्यायाधीश को तत्कालीन भारत सरकार द्वारा कूटनीतिक मिशन पर बाहर भेजा गया था। इस सरकार के शासन के दौरान भी हमारे सामने एक मामला आया है जिसमें मुख्य न्यायाधीश या किसी न्यायाधीश - मैं अभी वह भूल रहा हूँ - वह किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश था, को किसी

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 24 मई, 1949, पृ. 266-67