अनुच्छेद 108 - Page 69

50 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

# माननीय सभापतिः अब हमारे पास चर्चा के लिए संशोधन और अनुच्छेद मौजूद हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं श्री टी.टी. कृष्णमाचारी द्वारा प्रस्तुत संशोधन संख्या 125 को स्वीकार करता हूँ।

संशोधन स्वीकृत हुआ।

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अनुच्छेद 108

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 1891 के लिए निम्नलिखित प्रतिस्थापित किए जाएंः

फ्कि अनुच्छेद 108 के लिए निम्नलिखित अनुच्छेद प्रतिस्थापित किए जाएंः

108 उच्चतम न्यायालय अभिलेख न्यायालय होगा और उसको अपने अवमान के लिए दंड देने की शक्ति सहित ऐसे न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी।

108क उच्चतम न्यायालय दिल्ली में अथवा ऐसे अन्य स्थान या स्थानों में अधिविष्ट होगा जिन्हें भारत का मुख्य न्यायमूर्ति राष्ट्रपति के अनुमोदन से समय-समय पर नियत करें।

महोदय, सामान्य बहस के बाद, मैं यह बताऊंगा कि मैं जो संशोधन प्रस्तुत कर रहा हूँ, वह क्यों जरूरी है।

** माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय, मैंने जो संशोधन प्रस्तुत किया है, उसमें व्यावहारिक तौर पर श्री कामत तथा श्री जसपतराय कपूर दोनों के द्वारा उठाए गए सभी मुद्दे शामिल हैं।

महोदय, नया अनुच्छेद 108 आवश्यक है क्योंकि हमने प्रारूप संविधान में उच्चतम न्यायालय के दर्जे को परिभाषित करने हेतु कोई उपबंध नहीं किया है। यदि सभा अनुच्छेद 192 पर गौर करें तो उसे भारत के उच्च न्यायालयों के संबंध में बिल्कुल वैसा ही अनुच्छेद नजर आएगा। इसलिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उच्चतम न्यायालय की स्थिति को परिभाषित करने के लिए ठीक उसी प्रकार का उपबंध संविधान में किया जाना चाहिए। मैं सभा को यह बताने में अधिक समय नहीं लेना चाहता कि ‘न्यायालय के अभिलेख’ का क्या अर्थ है। मैं संक्षेप में यह बता सकता हूँ कि अभिलेख न्यायालय

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 27 मई, 1949, पृ. 377

# पूर्वोक्त पृष्ठ 377