अनुच्छेद 108 - Page 70

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वह न्यायालय होता है जिसके अभिलेख को साक्ष्य मूल्य के रूप में स्वीकृत किया जाता है और किसी न्यायालय के समक्ष उन्हें प्रस्तुत किया जाता है तो उसके बारे में कोई और प्रश्न नहीं पूछा जाता। अभिलेख न्यायालय का अर्थ यही है। फिर अनुच्छेद 108 के दूसरे भाग में कहा गया है कि अवमानना के दोषी के लिए न्यायालय को ही सजा देने की शक्ति होगी। तथ्यात्मक रूप से, एक बार आप सांविधिक तौर पर अभिलेख न्यायालय गठित कर देते हैं, तो अवमानना के लिए दोषी को सजा देने की शक्ति उस स्थिति से आवश्यक तौर पर उसे प्राप्त हो जाती है। लेकिन, इस तथ्य के दृष्टिगत यह महसूस किया गया कि इंग्लैंड में यह शक्ति मुख्यतः कॉमन लॉ से प्राप्त होती है और इस देश में हमारे यहाँ कॉमन लॉ जैसी कोई चीज नहीं है, इसलिए हमने महसूस किया कि सांविधिक में ही पूरी स्थिति का उल्लेख किया जाना बेहतर होगा। यही कारण है कि अनुच्छेद 108 का प्रावधान किया गया है।

श्री कामत ने अनुच्छेद 108-क के संबंध में एक मुद्दा उठाया है कि, इसमें दिल्ली शब्द क्यों दिया जाना चाहिए। इसका उत्तर बड़ा ही सरल है। न्यायालय का एक निश्चित स्थान होना चाहिए जहाँ वह बैठेगा और मुकदमा लड़ने वालों को इस बारे में जानकारी होनी चाहिए कि उन्हें किस स्थान पर जाना है और किसके पास पहुँचना है। परिणामतः संविधान में ही न्यायालय के बैठने के स्थान के बारे में उल्लेख करना जरूरी है और यही कारण है कि दिल्ली शब्द जरूरी है और इसलिए इस प्रयोजनार्थ इसका उल्लेख करना है। अनुच्छेद 108-क में उल्लिखित अन्य शब्द इसलिए दिए गए हैं क्योंकि अभी तक यह परिभाषित किया जाना बाकी है कि क्या भारत की राजधानी दिल्ली ही बनी रहेगी या नहीं। यदि आप इसमें उपयुक्त शब्द नहीं डालेंगे तो इसका आशय यह निकलेगा, फ्या किसी अन्य स्थान या स्थानों पर जहाँ कि भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति के अनुमोदन से समय-समय पर तय करते रहे हैं।य् फिर इससे यह होगा। मान लो कि भारत की राजधानी में बदलाव हो जाता है तो फिर हमें संविधान में इस आशय का संशोधन करना पड़ेगा कि उच्चतम न्यायालय ऐसे किस अन्य स्थान पर जहाँ कि जिसे संसद राजधानी बनने का निर्णय लेती है, बैठेगा। इसलिए मैं समझता हूँ कि इसके बाद इस शब्द का उल्लेख होना आवश्यक है। मेरे मित्र माननीय श्री कपूर द्वारा उठाए गए मुद्दे के संबंध में मैं समझता हूँ कि मेरे मित्र श्री कृष्णमाचारी द्वारा दिया गया उत्तर पर्याप्त है और मैं और कुछ नहीं कहना चाहता।

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श्री जसपतराय कपूरः क्या मैं डॉ. अम्बेडकर से छोटा सा स्पष्टीकरण मांग सकता हूँ? क्या उच्चतम न्यायालय जब तक यह दिल्ली में बैठता है, उसके लिए इस देश में किसी और स्थान पर साथ-साथ इजलास लगाने का विकल्प है?