52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ, बिल्कुल है। सर्किट न्यायालय पीठ ही होती है।
¹डॉ. अम्बेडकर के संशोधन स्वीकृत हुए। शेष संशोधन अस्वीकृत हुए। अनुच्छेद 108 और 108-क, यथासंशोधित संविधान में जोड़े गए।ह्
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* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं चाहता हूँ कि अनुच्छेद 109 से 114 तक स्थगित रखे जाएं। मैं इन अनुच्छेदों को स्थगित इसलिए रखना चाहता हूँ क्योंकि इन अनुच्छेदों में जहाँ सामान्य नियमों के बारे में बताया गया है, वहीं इनमें अनुसूची 1 के भाग III में उल्लिखित राज्यों के संबंध में कतिपय आपत्तियाँ की गई हैं। इस बात की संभावना है कि भाग प्प्प् में उल्लिखित राज्यों की स्थिति के बारे में पुनर्विचार किया जा रहा है। ताकि इस राज्यों को भाग प् में उल्लिखित राज्यों के समान स्तर और स्थिति में लाया जा सके। यदि वैसा होता है तो इन अनुच्छेदों अर्थात् 109 से 114 में इन आपत्तियों को दर्ज कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेरा सुझाव है कि इन अनुच्छेदों को स्थगित रखा जाए।
माननीय सभापतिः वर्तमान में हम उनको छोड़ देते हैं।
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** माननीय सभापतिः संशोधन 1939 जो डॉ. अम्बेडकर के नाम से है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्अनुच्छेद 115 में, ये शब्द और कोष्ठक ‘(जो मूलाधिकारों को लागू किए जाने से संबंधित हैं)’ हटा दिए जाएं।य् ये फालतू शब्द हैं।
माननीय सभापतिः संशोधन संख्या 1940 अभी-अभी प्रस्तुत संशोधन से बिल्कुल मेल खाता है इसलिए इसे प्रस्तावित करने की जरूरत नहीं है। संख्या 1941 श्री नजरुद्दीन अहमद के नाम से है और उसका भी स्वरूप प्रारूप से संबंधित है और उसे प्रस्तावित करने की जरूरत नहीं है। संख्या 1942 का प्रस्ताव नहीं किया जाना है।
मेरे विचार से हमारे पास यही संशोधन है।
क्या किसी सदस्य को कुछ और कहना है?
अब हम संशोधनों पर चर्चा शुरू करेंगे।
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 27 मई, 1949, पृ. 383
** पूर्वोक्त, पृष्ठ 383-84