53
मैं सबसे पहले डॉ. अम्बेडकर के संशोधन संख्या 1939 (ऊपर में उल्लिखित) को लूँगा। (संशोधन स्वीकृत हुआ।)
¹डॉ. बख्शी टेक चन्द के संशोधन में संशोधन संख्या 1938 जैसा कि नीचे दिया गया है, भी स्वीकृत हुआ।ह्
फ्अनुच्छेद 115 में, या ‘याचिकाओं के रूप में आदेशों’ शब्दों के स्थान पर ‘याचिकाओं सहित आदेश या याचिकाएं’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँ।य्
¹अनुच्छेद 115 यथासंशोधित संविधान में जोड़ा गया।ह्
* * * * *
अनुच्छेद 117
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं एक मुद्दे का उल्लेख करना चाहूँगा। प्रस्तावित अनुच्छेद की मंशा कतिपय यह नहीं है कि उच्चतम न्यायालय को अपने ही निर्णय से बंधने के लिए बाध्यकारी होना चाहिए। जैसा कि हाउस ऑफ लॉर्ड्स के मामले में है। उच्चतम न्यायालय अपने निर्णय को बदलने तथा पूर्व में दिए गए निर्णय से अलग विचार अपनाने के लिए स्वतंत्र होगा। जहाँ तक भाषा का संबंध है, मैं बिल्कुल संतुष्ट हूँ कि यह सही मंशा को व्यक्त करती है।
श्री एच.वी. कामतः तो फिर हम यह क्यों नहीं कहें। ‘सभी अन्य न्यायालय?’
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः फ्सभी न्यायालयय् का अर्थ है फ्सभी अन्य न्यायालयय्।
¹अनुच्छेद 117 बिना संशोधन के स्वीकृत हुआ और संविधान में जोड़ा गया।ह्
* * * * *
अनुच्छेद 119
** माननीय सभापतिः संशोधन संख्या 1951 को खारिज कर दिया गया।
श्री एच.वी. कामतः महोदय मैं अपने संशोधन 1952 के बारे में कहना चाहता हूँ कि यह एक साधारण संशोधन है। इस अनुच्छेद में यह कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय राष्ट्रपति को अपनी राय से अवगत कराएगा या फिर उसे अपनी राय को रोक कर रखने का विवेक प्राप्त होगा। मेरा मानना है कि इसका अर्थ यह है कि जब
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 27 मई, 1949, पृ. 386
++ पूर्वोक्त पृष्ठ 387
** ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 27 मई, 1949, पृ. 386