54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
राष्ट्रपति किसी मामले को उच्चतम न्यायालय के पास उसकी राय के लिए भेजता है, तो उच्चतम न्यायालय के पास राय देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। यदि इसका अर्थ यह नहीं है तो इसकी भाषा सही है। लेकिन, यदि इसका अर्थ यह है कि एक बार राष्ट्रपति किसी मामले को उच्चतम न्यायालय के पास भेज दे, तों उसे राष्ट्रपति को उस पर अपनी राय देना जरूरी है, तो फिर फ्शैलय् शब्द आना चाहिए था। मैं उस मुद्दे पर स्पष्टीकरण चाहता हूँ।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उच्चतम न्यायालय के लिए ऐसा करना बाध्यकारी नहीं है।
श्री एच.वी. कामतः तो फिर मैं अपना संशोधन प्रस्तुत नहीं करता।
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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मेरा इस अनुच्छेद 119 को स्थगित करने का अनुरोध है क्योंकि यह भी अनुच्छेद 109 से 114 के संदर्भ में है। जिन्हें हमने स्थगित रखने का निर्णय लिया है।
श्री एच.वी. कामतः महोदय तो फिर बाद में मुझे अपना संशोधन प्रस्तुत करने का अधिकार सुरक्षित रखना चाहिए।
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अनुच्छेद 121
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मेरा अनुरोध है कि इस अनुच्छेद को स्थगित रखा जाए।
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अनुच्छेद 122
# माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि विद्यमान अनुच्छेद 122 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रस्थापित किए जाएंः-
122. उच्चतम न्यायालय के अधिकारी और सेवक तथा व्यय - (1) उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों की नियुक्तियाँ भारत का मुख्य न्यायमूर्ति करेगा या उस न्यायालय का ऐसा अन्य न्यायाधीश या अधिकारी करेगा जिसे वह निर्दिष्ट करेः
* ख्., पूर्वोक्त पृष्ठ 387
# ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 27 मई, 1949, पृ. 387
+ पूर्वोक्त पृष्ठ 388