अनुच्छेद 130 - Page 82

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की ऐसी कोई शक्ति नहीं देने जा रहे हैं ताकि यदि उसके द्वारा इन नियमों में कोई संशोधन किया जा सके क्योंकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह वर्तमान में विद्यमान मंत्रालय अर्थात् कार्यपालिका की सलाह पर कार्य करेगा। मैं यह स्वीकार करता हूँ कि उस हद तक इसमें विसंगति विद्यमान है लेकिन मैं आशा करता हूँ कि मेरे माननीय मित्र श्री सिधवा जो कि नई संसद के गठन होने के समय भी सदस्य के रूप में कार्य करतें रहेंगे_ स्वयं ही सबसे पहले संसद से यह आग्रह करेंगे कि इस स्थिति में बदलाव किया जाए और इन नियमों के स्थान पर संसद द्वारा कानून बनाए जाएँ।

¹डॉ. अम्बेडकर द्वारा पूर्व में उल्लिखित संशोधन के अलावा पंडित कुंजरू का निम्नलिखित संशोधन स्वीकृत हुआ।ह्

फ्कि अनुच्छेद 130 के खण्ड (1) में, शब्द के बाद ‘राज्य के लोगों की ओर से शब्द अन्तःस्थापित किए जाएं।य्

(अनुच्छेद 125, यथासंशोधित रूप में संविधान में जोड़ा गया।)

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अनुच्छेद 127

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बंबई - जनरल)ः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 127 में ‘संसद’ शब्द के स्थान पर ‘संसद के दोनों सदन’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँ।य्

यह सिर्फ औपचारिक संशोधन है।

संशोधन स्वीकृत हुआ।

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अनुच्छेद 130

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, यह अनुच्छेद 42 जोकि संघ की कार्यपालक शक्ति से संबंधित है, की हू-ब-हू पुनरावृत्ति है। इसमें बिल्कुल भी परिवर्तन नहीं किया गया है। यह अनुच्छेद 42 की अक्षरशः नकल है। मैंने संशोधनों की पुस्तिका में यह पाया है कि अनुच्छेद 42 में बिल्कुल वही संशोधन रखे गए थे और उन पर विस्तार से बहस हुई थी। मैं नहीं समझता कि मैं अनुच्छेद 42 पर हुई बहस के दौरान कही गई बातों को उपयोगी ढंग से जोड़ सकता हूँ और उन पर कोई संशोधन प्रस्तुत कर

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 30 मई, 1949, पृ. 415