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64 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सकता हूँ। इसलिए, मेरा निवेदन है कि मैं यहाँ प्रस्तुत किसी भी संशोधनों को स्वीकार करने हेतु तैयार नहीं हूँ।

¹प्रो. के.टी. शाह, श्री मोहम्मद ताहिर और श्री नजरुद्दीन अहमद द्वारा प्रस्तुत सभी तीनों संशोधन सभा द्वारा अस्वीकृत किए गए।ह्

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अनुच्छेद 131

# माननीय सभापतिः यह केवल संशोधनों को क्रम में रखे जाने का प्रश्न है। मैं सबसे पहले चुनाव के प्रश्न को निपटाना चाहता हूँ।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः इसका विकल्प प्रस्तुतकर्ता पर छोड़ा जा सकता है। डॉ. अम्बेडकर को यह कहने दें कि वह कौन-सा प्रस्ताव प्रस्तुत करना चाहते हैं। सामान्य प्रक्रिया तो विशेष अनुच्छेद प्रस्तुत करने की होगी। प्रारूप समिति के अध्यक्ष ही विकल्प का चुनाव करेंगे, यदि आप उन्हें ऐसा करने की अनुमति दें, तो समस्या का समाधान हो जाएगा। वह इन विकल्पों में से एक को प्रस्तुत कर सकते हैं। बाद में यह प्रक्रिया सामान्य प्रक्रिया के रास्ते में आड़े आएगी। अतः मेरे विचार से सबसे अच्छी बात यही होगी कि इसे प्रस्तुतकर्ता के विवेक पर छोड़ दिया जाए। यदि आप डॉ. अम्बेडकर को प्रस्तावक के रूप में मान्यता देते हैं, तो उन्हें एक या दूसरे विकल्प को प्रस्तुत करने के लिए कहा जा सकता है।

माननीय सभापतिः क्या डॉ. अम्बेडकर अन्य विकल्पों में से किसी एक को स्वीकार करने को तैयार हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के संबंध में कुछ कहना चाहता हूँ। अनुच्छेद 131 को यथास्थिति के रूप में लेते हैं, तो उसमें कोई संशय नहीं है कि इसे वैकल्पिक तौर पर प्रस्तुत करना पड़ेगा। दोनों विकल्पों में एक बात समान है वह यह है कि दोनों में राज्यपाल का चुनाव किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। चुनाव किस तरीके से कराया जाए, फिलहाल एक गौण मुद्दा है। उसके बारे में यहाँ पर तीन या चार संशोधन प्रस्तुत किए गए हैं। उसमें एक सिद्धांत तय किया गया है जो दो वैकल्पिक प्रारूपों 131 की पूरी तरह से विरोध में है और उनमें यह सुझाव दिया गया है कि राज्यपाल को नामांकित किया जाना चाहिए। यदि उस संशोधन को सभा द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है जिसमें राज्यपाल को नामांकित करने की बात कही गई है, तो ये दोनों ही विकल्प समाप्त हो जाएंगे और सभा के लिए उनके बारे में

* पूर्वोक्त पृष्ठ 423

# ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 30 मई, 1949, पृ. 425