70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
किया गया है। एक दूसरा संशोधन 2041 है जिसके बारे में यह संशोधन है। लेकिन उसे भी प्रस्तुत नहीं किया गया है।
माननीय सभापतिः लेकिन उस संशोधन को प्रस्तुत नहीं किया गया है।
श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः संशोधन संख्या 2041 डॉ. अम्बेडकर के नाम से है।
माननीय सभापतिः ठीक है, वह इसे औपचारिक तौर पर प्रस्तुत कर सकते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं यह कह चुका हूँ कि मैं उस संशोधन के स्थान पर इसे प्रस्तुत कर रहा हूँ।
माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर संशोधन संख्या 2041 प्रस्तुत कर रहे हैं।
* * * * *
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, स्थिति इस प्रकार हैः
राष्ट्रपति को सामान्य अर्थों में उसे हटाने की यह शक्ति दी गई है। प्रो. शाह यह चाहते हैं कि राज्यपाल को हटाए जाने के लिए संविधान में ही कतिपय आधारों का उल्लेख किया जाना चाहिए। मुझे ऐसा लगता है कि जब आपने राष्ट्रपति को एक सामान्य शक्ति प्रदान कर दी है, तो आप राज्यपाल को भ्रष्टाचार, संविधान का उल्लंघन या किसी अन्य कारण से जिसे राष्ट्रपति को यह मानने में तनिक भी संदेह नहीं हो कि राज्यपाल को हटाने के लिए वह एक वैध आधार है, के कारण से हटाने की शक्ति भी प्रदान कर देते हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि संविधान में इतनी सारी सीमाओं का उल्लेख करके उसे अनावश्यक रूप से बोझिल बनाना होगा जबकि उस सूत्र के अधीन कि राज्यपाल राष्ट्रपति की समुक्ति पर पद पर बना रहेगा, के आधार पर राष्ट्रपति के लिए कार्यवाही कर पाना पूरी तरह से संभव होगा। इसलिए, मेरे विचार से इन शर्तों को वर्गीकृत करना अनावश्यक है जिसके अधीन राष्ट्रपति राज्यपाल को हटा सकता है।
¹डॉ. अम्बेडकर का उपर्युक्त संशोधन स्वीकृत हुआ। अनुच्छेद 132, यथासंशोधित रूप में संविधान में जोड़ा गया।ह्
अनुच्छेद 134
** माननीय सभापतिः हमने पहले विकल्प को छोड़ दिया है और हमें केवल दूसरे विकल्प के मामले में संशोधन लेने हैं और मैं समझता हूँ कि संशोधन संख्या 164 जो डॉ. अम्बेडकर के नाम से है। इस मामले को कवर कर लेगा।
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 31 मई, 1949, पृ. 470
डाट्स व्यवधान दर्शाता है
पूर्वोक्त पृष्ठ 474