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यह सुझाव है कि अनुच्छेद 135 में, फ्निर्वाचितय् शब्द का लोप किया जाए।
माननीय सभापतिः वह तो स्पष्ट है।
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अनुच्छेद 136
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि अनुच्छेद 136 में ‘राज्य विधानमंडल के सदस्यों की उपस्थिति में’ शब्दों के स्थान पर ‘उस राज्य की अधिकारिता वाले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति या उसकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँ।य्
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माननीय सभापतिः चूंकि संशोधन संख्या 2107, 2108, और 2109 प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। अतः मैं यह मान लेता हूँ कि उन्हें प्रस्तुत कर दिया गया है। क्या डॉ. अम्बेडकर प्रस्तुत संशोधनों पर कोई उत्तर देना चाहते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं श्री टी.टी. कृष्णमाचारी द्वारा प्रस्तुत संशोधन तथा मेरे मित्र श्री कामत द्वारा प्रस्तुत एक संशोधन को स्वीकार करता हूँ।
(वे संशोधन जिन्हें डॉ. अम्बेडकर ने स्वीकार किया, निम्नलिखित रूप में प्रस्तुत किए गए थे)ः
कि संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2104 में निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएः
फ्कि अनुच्छेद 136 में ‘राज्य विधानमंडल के सदस्यों की उपस्थिति में’ शब्दों के स्थान पर ‘उस राज्य की अधिकारिता वाले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति या उसकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँ।य्
फ्संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2106 में, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएः-
फ्कि अनुच्छेद 136 में ‘अमुक सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ (या शपथ लेता हूँ)’ शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंः
‘मैं अमुक ईश्वर की शपथ लेता हूँ सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ’
पंडित हृदयनाथ कुंजरू (संयुक्त प्रान्त जनरल)ः शपथ किस प्रकार पढ़ी जाएगी?
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 31 मई, 1949, पृ. 484