74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
क्या इसे ऐसे पढ़ा जाएगा, फ्मैं भगवान के नाम पर शपथ लेता हूँ या मैं प्रतिज्ञान लेता हूँय् या नहीं? प्रश्न यह है कुछ लोग ऐसा मान सकते हैं कि राज्यपाल को भगवान के नाम पर शपथ लेनी चाहिए। जबकि इस देश में कुछ लोग नास्तिक हो सकते हैं (व्यवधान) सभापति महोदय ने शपथ को पढ़कर सुनाया (मैं इसमें एक विकल्प देख रहा हूँ।) मैं यह जानना चाहता था यदि कोई भगवान के नाम पर शपथ नहीं लेना चाहता हो तो उसे ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
माननीय सभापतिः नहीं, नहीं।
प्रस्ताव हैः
फ्कि अनुच्छेद 136, यथासंशोधित रूप में संविधान का भाग बने।य्
(प्रस्ताव स्वीकृति हुआ।)
अनुच्छेद 136 यथासंशोधित रूप में संविधान में जोड़ा गया।
तत्पश्चात् सभा बुधवार, 1 जून, 1949 मध्याह्न पूर्व 8.00 बजे तक के लिए स्थगित हुई।
अनुच्छेद 137
* माननीय सभापतिः आज हम अनुच्छेद 137 से शुरू करतें हैं। इसमें एक संशोधन है जिसके बारे में श्री ब्रजेश्वर प्रसाद ने सूचना दी हुई है लेकिन, वह एक नकारात्मक संशोधन है।
(संशोधन संख्या 2111 प्रस्तुत नहीं किया गया।)
श्री टी.टी. कृष्णामाचारी (मद्रासः जनरल)ः पूर्व में लिए गए निर्णय के दृष्टिगत इस अनुच्छेद को प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
श्री ब्रजेश्वर प्रसाद (बिहार - जनरल)ः इस पर सभा में मत लिया जाना चाहिए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बईः जनरल)ः इस पर मत लिया जाए।
माननीय सभापतिः अन्य कोई भी संशोधन प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। मैं ऐसा मानता हूँ। ¹अनुच्छेद 137 संविधान से हटाया गया।ह्
अनुच्छेद 143
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय, मैं नहीं समझता कि मेरे
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 1 जून, 1949, पृ. 487