अनुच्छेद 143 - Page 94

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मित्र श्री टी.टी. कृष्णामाचारी ने श्री कामत के इस संशोधन के बारे में जो कुछ कहा है उसके बाद मेरे लिए इस पर बोलना तथा इसमें भाग लेना जरूरी है। लेकिन, चूंकि मेरे मित्र पंडित कुंजरू ने बार-बार मुझसे प्रश्न पूछा है और उस पर उत्तर दिए जाने की मांग की है, इसलिए शिष्टाचारवश मुझे दो शब्द कहने चाहिए। महोदय, मुख्य और महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या राज्यपाल को विवेकाधीन शक्तियां दी जानी चाहिए? यही एक मुख्य और प्रमुख प्रश्न है। इसके बाद हम इस प्रश्न के बारे में लिए गए कुछ निर्णय पर आते हैं, दूसरा प्रश्न यह है कि क्या अनुच्छेद 143 के खण्ड (1) के अन्तिम भाग में प्रयुक्त किए गए शब्दों को उस अनुच्छेद में बनाए रखा जाना चाहिए या उन्हें कहीं अन्यत्र स्थानांतरित किया जाना चाहिए, उस बारे में विचार किया जा सकता है। पहली बात यह है और इसलिए मैं स्वयं को इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए प्रस्तुत करता हूँ जिसे मैं महत्त्वपूर्ण मानता हूँ। बहस के दौरान यह कहा गया है कि राज्यपाल को विवेकाधीन शक्तियां बनाए रखना प्रान्तों में जिम्मेदार सरकार की भावना के विपरीत है। यह भी कहा गया है कि राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों को बनाए रखे जाने में भारत सरकार अधिनियम, 1935 जो कि मुख्य तौर पर अलोकतांत्रित अधिनियम था, की बू आती है। अब अपनी ओर से मैं यह कहना चाहता हूँ कि मेरे मन में इस बारे में कोई शंका नहीं है कि राज्यपाल को कतिपय विवेकाधीन शक्तियाँ प्रदान किया जाना किसी भी मायने में जिम्मेदार सरकार के विपरीत नहीं है या ये शक्तियां दिया जाना उस अवधारणा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता है। मैं उस मुद्दे को नहीं लेना चाहता हूँ क्योंकि मैं इस मुद्दे पर सभा को कनाडा के संविधान तथा ऑस्ट्रेलिया के संविधान के उपबंधों का संदर्भ देकर संतुष्ट कर सकता हूँ। मेरे विचार से इस सभा में कोई भी ऐसा नहीं होगा जो इस पर विवाद खड़ा करेगा कि कनाडा की सरकार की प्रणाली पूरी तरह से जिम्मेदार प्रणाली नहीं है और न ही इस सभा में कोई इस बात को चुनौती देगा कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार जिम्मेदार सरकार के रूप में कार्य नहीं करती है। यह कहते हुए मैं कनाडा के संविधान की धारा 55 को पढ़ता हूँ।

धारा 55 - जहाँ संसद के सदनों के द्वारा पारित किसी विधेयक को महारानी की स्वीकृति के लिए गवर्नर जनरल को प्रस्तुत किया जाता है, तो वह अपने विवेक के अनुसार और इस अधिनियम के उपबंधों के विषयाधीन महारानी के नाम पर विधेयक को स्वीकृति प्रदान कर देता है अथवा महारानी की स्वीकृति लेने के लिए उसे स्थगित रखता है अथवा महारानी के हस्ताक्षर के लिए विधेयक को अपने संरक्षण में रख लेता है।

पंडित हृदयनाथ कुंजरूः क्या मैं डॉ. अम्बेडकर से यह पूछ सकता हूँ कि ब्रिटिश उत्तरी अमेरिका अधिनियम कब पारित किया गया था?

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 1 जून, 1949, पृ. 500-02