अनुच्छेद 144 - Page 97

78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री एच.वी. कामतः क्या राष्ट्रपति तथा उनके मंत्रियों से संबंधित अनुच्छेद 61 (1) तथा इस अनुच्छेद के बीच कोई विषयगत अन्तर्गत नहीं है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः निःसंदेह क्योंकि हम राष्ट्रपति में कोई भी विवेकाधीन शक्ति निहित नहीं करना चाहते। चूंकि प्रान्तीय सरकारों को केन्द्रीय सरकार के अधीनस्थ होकर कार्य करने की जरूरत पड़ सकती है और इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रान्तीय सरकारें केन्द्रीय सरकार के अधीन होकर कार्य करें। राज्यपाल के लिए कतिपय चीजें आरक्षित करनी पड़ेंगी ताकि राष्ट्रपति को यह सुनिश्चित करने का अवसर प्राप्त हो सके कि जिन नियमों के अधीन प्रान्तीय सरकारों को संविधान के अनुरूप या केन्द्रीय सरकार के अधीनस्थ होकर कार्य चल रहे हैं।

श्री एच.वी. कामतः क्या इस प्रकार की सामान्य विवेकाधीन शक्तियाँ प्रदान करने के स्थान पर विवेकाधीन शक्तियों के संबंध में संविधान में ही कतिपय अनुच्छेदों को विनिर्दिष्ट कर दिया जाना बेहतर नहीं रहेगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं यह कह चुका हूँ कि मैं इसे बड़ी तत्परता के साथ करूँगा। यदि मुझे इस बात की जानकारी हो जाए कि यह सभा राज्यपाल में विवेकाधीन शक्तियाँ निहित किए जाने के संबंध में संविधान में किन अनुच्छेदों को शामिल करने जा रही है तो मैं विशिष्ट अनुच्छेदों का उपबंध करने के लिए तैयार हूँ।

श्री एच.वी. कामतः इसे स्थगित क्यों नहीं रख दिया जाए?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हम इसमें संशोधन कर सकते हैं। यह सभा अनुच्छेद 143 को संशोधित करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम है। यदि इस पर पूरी तरह से विचार करने के बाद सभा यह महसूस करती है कि अनुच्छेदों के बारे में विशिष्ट रूप से उल्लेख कर दिया जाना बेहतर रास्ता होगा तो वह ऐसा कर सकती है। यह तो पूरी तरह से तर्क की बात है।

¹दो संशोधन अस्वीकृत हुए। अनुच्छेद 143 संविधान में जोड़ा गया।ह्

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अनुच्छेद 144

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्अनुच्छेद 144 के खण्ड (1) के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएःय्

144 (1) मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा तथा मंत्री, राज्यपाल के प्रसादपर्यंत अपना पद

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 1 जून, 1949, पृ. 503