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धारण करेंगे।
परंतु बिहार, मध्य प्रदेश और उड़ीसा राज्यों में जनजातियों के कल्याण का भारसाधक एक मंत्री होगा जो साथ ही अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के कल्याण का या किसी अन्य कार्य का भी भारसाधक हो सकेगा।
(1 क) मंत्री-परिषद राज्य की विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी।
श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः मेरा यह सुझाव है कि माननीय डॉ. अम्बेडकर अनुच्छेद 144 के खण्ड (1 क) में फ्मंत्रियों केय् शब्दों के बाद फ्परिषद्य् शब्द जोड़कर इसे बदल सकते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह बिल्कुल ठीक है। यह अनुच्छेद 62 के अनुरूप होगा। मैं वह संशोधन प्रस्तुत करता हूँ।
श्री महावीर त्यागीः मैं यह जानना चाहता हूँ कि बिहार और अन्य स्थानों के लिए विशेष मंत्री की नियुक्ति का क्या तरीका होगा? क्या मंत्री की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल द्वारा की जाएगी - यह तो बिल्कुल ही स्पष्ट है कि ऐसा होगा, लेकिन जब आप कहते हैं फ्बशर्तेय् तो इसका अर्थ यह हो जाता है कि इसमें जो कुछ पहले कहा जा चुका है वह इन मंत्रियों के मामले में लागू नहीं होगा।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसमें यह कहा गया है कि खण्ड (1) के अधीन नियुक्त किए गए मंत्रियों के मामले में इसका अर्थ यह है कि उन लोगों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, एक मंत्री इस विभाग का प्रभारी होगा।
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* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि अनुच्छेद 144 के खण्ड (4) में ‘अपने मंत्रियों को चुनने और उनके साथ अपने संबंध के मामले में’ शब्दों के स्थान पर ‘अपने मंत्रियों के चयन में और संविधान के अधीन अपने अन्य कृत्यों का प्रयोग करने में’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएं।य्
महोदय, यह महज एक शाब्दिक संशोधन है।
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+ माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्अनुच्छेद 144 के खण्ड (6) का लोप किया जाए।य्
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 1 जून, 1949, पृ. 506
++ पूर्वोक्त पृष्ठ 579