80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री बृजेश्वर प्रसादः क्यों?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः क्योंकि कतिपय अनुच्छेदों में परिभाषित की गई शक्तियों से अधिक विवेकाधीन शक्ति हम प्रदान नहीं करना चाहते, हम आपकी मांग को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
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* श्री जसपतराय कपूरः यदि किसी सदस्य को तकनीकी आधार पर कोई आपत्ति हो तो वह अलग बात है लेकिन, यह एक ऐसा संशोधन है जो डॉ. अम्बेडकर तथा अधिकतर अन्य सदस्यों जिनके साथ मैंने परामर्श किया है, को स्वीकार्य है। इसे अनुमति दिए जाने में कोई नुकसान नहीं है। यदि डॉ. देशमुख इस संशोधन के विरोध में हैं तो निश्चय ही उन्हें इसके पक्ष में तर्क देने पड़ेंगे और उन्हें सभा को यह बताने का अवसर देना होगा कि सभा इसे अस्वीकृत कर दे।
माननीय सभापतिः क्या उससे चर्चा फिर दुबारा शुरू नहीं हो जाएगी?
डॉ. पी.एस. देशमुखः जी हाँ। यदि डॉ. अम्बेडकर इसे स्वीकार करने को तैयार हों तो इसका दूसरा रास्ता भी है। परंतुक को अलग से रखा जा सकता है और यदि वह अस्वीकृत हो जाए तो उसका लोप कर दिया जाएगा।
माननीय सभापतिः हाँ, वह एक तरीका हो सकता है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं परंतुक को हटाने की बात को स्वीकार नहीं कर रहा हूँ लेकिन मैं इस बात के लिए पूरी तरह से तैयार हूँ कि इस परंतुक को किस अनुच्छेद से अनुदेशों के साधन वाले स्थान पर रख दिया जाए।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मेरा यह प्रस्ताव है कि इस अनुच्छेद को स्थगित रखा जाए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस पर इतनी लम्बी बहस करने के बाद ऐसा क्यों किया जाए?
माननीय सभापतिः प्रश्न यह है कि क्या इसे यही बनाए रखा जाए या फिर इसे अनुदेशों के साधन वाले स्थान पर रखा जाए...
+ पूर्वोक्त, पृष्ठ 507
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 1 जून, 1949, पृ. 506
+ पूर्वोक्त पृष्ठ 507
++ पूर्वोक्त पृष्ठ 519