80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
संबंधी सिफारिशों का संबंध है, इस विषय को संसद पर छोड़ा जा सकता है। मेरा निवेदन है कि यह मुद्दा अब बंद हो चुका है। हमने अनुच्छेद को पारित करके या तो आरंभिक प्रक्रम पर या पश्चात्वर्ती प्रक्रमों पर आयकर का आवंटन और वितरण राष्ट्रपति पर छोड़ दिया है।
अब, दूसरा मुद्दा जो अनुच्छेद 261 के अन्तर्गत आता है, केन्द्र स्तर पर उद्गृहीत राजस्व के वितरण के विषय में है। अनुच्छेद से यह भी स्पष्ट है कि हम पारित कर चुके हैं कि यह विषय संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा नियंत्रित होगा। राष्ट्रपति स्वयं यह नहीं कर सकता। अतः वह ‘‘संसद के समक्ष एक ज्ञापन रखेगा जिसमें उस कार्रवाई का उल्लेख होगा जो की गई है “शब्दों से केवल यह अभिप्रेत है कि राष्ट्रपति यह कहेगा क्योंकि वह कहने के लिए बाध्य होगा कि आगमों को विनियमित या स्वीकृत करने के लिए और उस रीति के बारे में विधेयक संसद के समक्ष पुरः स्थापित किया जाएगा और उस रीति के बारे में जिसमें वे आवंटित किए जाने है। परिणामस्वरूप, यदि मेरे मित्र श्री शिब्बनलाल सक्सेना अनुच्छेद 261 का पाठ अन्य पारित किए गए अनुच्छेदों के सापेक्ष करेंगे तो वे समझ पाएंगे कि जहाँ तक उत्पाद शुल्क के वितरण का संबध है, परिणाम वही होगा जो अपने संशोधन द्वारा वे लाना चाहते हैं। अतः मेरे विचार में, उनका संशोधन बिल्कुल अनावश्यक है।
माननीय सभापति : अब मैं संशोधनों को मतदान के लिए रखता हूँ।
[ डॉ. अम्बेडकर के संशोधन से संशोधित अनुच्छेद 261 अंगीकृत हुआ और संविधान में जोड़ा गया। ]
अनुच्छेद 263
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं प्रस्तावित करता हूँ “कि अनुच्छेद
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263के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाए-
’263 (1) भारत की संचित निधि, ऐसी निधियों में धनराशियों के संदाय, उनसे धनराशियों के निकाले जाने तथा पूर्वोक्त विषयों का विनिमयन संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा किया जाएगा और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक राष्ट्रपति द्वारा निर्मित नियमों द्वारा किया जाएगा।
संचित
निधियों
की
अभिरक्षा, ऐसी निधियों
में धनराशियों का संदाय
और उनमें से निकाली
जानी-
(2) राज्य की संचित निधि की अभिरक्षा, ऐसी निधि में धनराशियों के संदाय और इनसे धनराशियाँ निकाले जाने, तथा पूर्वोक्त विषयों से संबंधित या उनके आनुषंगिक
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 10 अगस्त, 1949, पृ. 330