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सभी विषयों का विनिमयन राज्य के विधानमंडल द्वारा निर्मित विधि द्वारा किया जाएगा और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक राज्य के राज्यपाल ......... द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा किया जाएगा।“
मैं नहीं समझता किसी स्पष्टीकरण की जरूरत है।
पंडित हृदयनाथ कुंजरू : माननीय सभापति महोदय, मैं प्रस्तावित करता हूँ -
“कि अभी डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन में, जहाँ कहीं भी ’संचित निधि’ शब्द आये हैं, उनके पश्चात् और “आकस्मिकता निधि“ शब्द अन्तः स्थापित किए जाएंगे तथा ’ऐसी निधि’ शब्द जहाँ कहीं भी आए हैं, उनके स्थान पर ’ऐसी निधियां’ शब्द रखे जाएंगे।“ सदन ने पहले ही आकास्मिकता निधि स्थापित करने के लिए सहमति दे दी है। अतः उस रीति के बारे में उपबंध करना आवश्यक है जिसमें धनराशि आकस्मिकता निधि में डाली जा सकेगी और उसमें से निकाली जा सकेगी। यह विशुद्ध रूप से एक औपचारिक संशोधन है और मुझे विश्वास है कि सदन इसे स्वीकार कर लेगा।
माननीय सभापति : मैं यह मानता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर पंडित कुंजरू के संशोधन को स्वीकार कर लेंगे।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं संशोधन को स्वीकार करता हूँ। यथा संशोधित अनुच्छेद 263 संविधान में जोड़ा गया।
अनुच्छेद 267
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं प्रस्तावित करता हूँ-
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|---|
“कि अनुच्छेद 267 में-
(1) ’भारत में सम्राट’ शब्दों के पश्चात् ‘‘अथवा संघ या किसी राज्य के कार्यों के संबंध में ऐसे प्रारंभ के पश्चात्’’ शब्द स्थापित किए जाएंगे;
(2) ’भारत के राजस्व’ शब्द जहाँ कहीं भी आए हों इन शब्दों के स्थान पर ‘भारत की संचित निधि’ शब्द रखे जाएं;
(3) ’राज्य के राजस्व’ जहाँ कहीं भी आए हों, इन शब्दों के स्थान पर ’राज्य की संचित निधि’ शब्द रखे जाएं,
(4) ’पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट’ शब्दों और अंकों को हटा दिया जाए; और
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 10 अगस्त, 1949, पृ. 330-34