अनुच्छेद 5 और 6 - Page 105

84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

“कि संशोधन सूची के संशोधन सं. 2972 के निर्देश में, अनुच्छेद 269 के खंड (2) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाए -

(2) भारत सरकार, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन अकथित की जाएं, किसी राज्य को उधार दे सकेगी या जहाँ तक अनुच्छेद 268 के अधीन नियत किन्हीं सीमाओं का उल्लंघन नहीं होता है वहाँ तक किसी ऐसे राज्य द्वारा लिए गए उधारों के संबंध में प्रत्याभूति दे सकेगी और ऐसे उधार देने के प्रयोजन के लिए अपेक्षित राशियां भारत की संचित निधि पर भारित होंगी।“

मेरे संशोधन सं. 107 से महत्वपूर्ण परिवर्तन यह हुआ है कि मूलतः भारत सरकार को इस विषय में पूरी आजादी दी गई थी, अब भारत सरकार की कार्रवाई ऐसी शर्तों के अधीन है जो संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा अधिकथित की जाएँ।

महोदय, मैं प्रस्तावित करता हूँ-

“कि अनुच्छेद 269 के खंड (3) में पहली अनुसूची के भाग 1 या भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट’ शब्दों और अंकों को हटा दिया जाए।“

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं नहीं समझता महोदय, कि कोई जवाब

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अपेक्षित है।

[ डॉ. अम्बेडकर के संशोधन द्वारा संशोधित अनुच्छेद 269 अंगीकृत हुआ और संविधान में जोड़ा गया। ]

अनुच्छेद 5 और 6

* माननीय सभापति : अब हम मूल प्रारूप के अनुच्छेद 5 और 6 को लेते हैं। मैं देखता हूँ कि इन दो अनुच्छेदों के कोई 130 या 140 संशोधनों का फैलता जंगल है मेरा सुझाव है कि डॉ. अम्बेडकर के लिए सर्वोत्तम मार्ग होगा अनुच्छेदों को उसी रूप में प्रस्तावित करना जिसमें उन्होंने उन्हें अंतिम रूप से तैयार किया है, तब मैं इस संशोधित प्रारूप के संशोधनों पर चर्चा करेंगे। डॉ. अम्बेडकर, मेरे विचार में अनुच्छेद 5 और 6 दोनों एक साथ काम करते हैं।

प्रो. के. टी. शाह : क्या मैं जान सकता हूँ कि मुद्रित सूची के संशोधनों का क्या हुआ? वे सब मूल प्रारूप के संशोधनों के रूप में पटल पर रखे गए है। मुझे आपका सुझाव समझ में नहीं आता कि अब आप इन संशोधनों को किस प्रकार लेंगे।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 10 अगस्त, 1949, पृ. 340-42