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माननीय सभापति : यदि कोई ऐसा संशोधन है जो सारवान प्रकृति का है, जो प्रारूपण समिति द्वारा प्रस्तावित रूप में संशोधित प्रारूपों में से किसी से संसक्त है तो मैं निश्चय ही उसे लूंगा, लेकिन मैं यह सदस्यों पर छोड़ता हूँ कि वे मुझे यह बताएँ कि कौन-सा संशोधन विशेष वे प्रस्तावित करना चाहते हैं।
डॉ. पी. एस. देशमुख : यदि मूल प्रारूप प्रस्तावित नहीं होता है तो उस प्रारूप पर रखे गए सब संशोधन धूल चाटेंगे।
माननीय सभापति : हम मूल प्रारूप को प्रस्तावित नहीं कर रहे हैं लेकिन उसे प्रस्तावित किया गया मान लिया जाएगा और फिर अन्य संशोधन लिए जाएंगे सदस्यगण देखेंगे कि डॉ. अम्बेडकर ने कुछ संशोधनों का नोटिस दिया है जो सदस्यों को परिचालित किए जा चुके हैं। पहला सूची 1 सं. 1 है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, क्या मैं वे संदर्भ बताऊं ? वे संशोधन
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जिनका नोटिस नागरिकता खंड के बारे में दिया गया है, विभिन्न सूचियों में फैले पड़े हैं, और मैं चाहता हूँ कि शुरू में सदस्यों को विभिन्न सूचियों के संदर्भ दे दिए जाएँ। पहला संशोधन सूची 1 का सं. 1 है। इसके बाद सूची IV के संशोधन सं. 128, 129, 130, 131, 132 और 133 आते हैं। इस अनुच्छेद के बारे में प्रारूपण समिति के ये विभिन्न प्रस्ताव हैं। मैं यह महसूस करता हूँ कि हो सकता है सदन इस स्थिति में न हो कि वह स्पष्ट और पूरा सवाल कर पाए यदि ये संशोधन पृथक-पृथक करके टुकड़ों में प्रस्तावित किए जाते हैं। इसलिए मैं जो कुछ प्रस्तावित करना चाहता हूँ वह यह है कि मैं एक समेकित संशोधन पेश करूंगा। इसमें संशोधन सं. 1, 128, 129, 130 और 133 हैं। मेरे मित्र श्री टी. टी. कृष्णमाचारी बाद में अन्य दो संशोधन पेश करेंगे वे हैं सूची IV के संशोधन सं. 131 और 132, संशोधन संख्या 129 में इसे इस प्रकार पढ़ा जाए - “प्रस्तावित अनुच्छेद 5 के“ बजाय प्रस्तावित अनुच्छेद 5क के’। यह मुद्रण त्रुटि है। इन मताभिव्यक्तियों के साथ मैं अपना संशोधन प्रस्तावित करता हूँ -
“कि अनुच्छेद 5 और 6 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद रखे जाएं -
संविधान के प्रारंभ “5. इस संविधान के प्रारंभ होने पर प्रत्येक व्यक्ति संविधान के प्रारंभ
की तारीख पर जिसका भारत राज्यक्षेत्र में अधिवास है और की तारीख पर
नागरिकता (क) जो भारत के राज्यक्षेत्र में जन्मा था या नागरिकता
(ख) जिसके माता-पिता में से कोई भारत के राज्यक्षेत्र में जन्मा था, या
(ग) जो इसके प्रारंभ से ठीक पहले से कम से कम पांच वर्ष तक भारत के