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राज्यक्षेत्र में ऐसी अनुज्ञा के अधीन लौट आया है जो पुनर्वास के लिए या स्थायी रूप से लौटने के लिए किसी विधि के प्राधिकार द्वारा या उसके अधीन दी गई है, और प्रत्येक ऐसे व्यक्ति के बारे में अनुच्छेद 5क के खंड (ख) के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि उसने भारत के राज्यक्षेत्र को 19 जुलाई, 1948 के पश्चात् प्रव्रजन किया है।“
श्री जसपत राय कपूर (संयुक्त प्रांत : साधारण) : आपने कहा था यह
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श्री टी. टी. कृष्णमाचारी द्वारा पेश किया जाएगा।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैंने इसे समेकित अनुच्छेद में सम्मिलित
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कर लिया है क्योंकि मैं इसे स्वीकार करना चाहता हूँ, जो उनके द्वारा पेश किया जाएगा।
5ख. अनुच्छेद 5 और 5 क में किसी बात के होते हुए भी, कोई व्यक्ति जो भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार भारत के बाहर रहने वाले या जिसके माता-पिता में से कोई अथवा पितामह या पितामही या मातामह या मातामही में से कोई (मूल रूप में यथा अधिनियमित) भारत सरकार अधिनियम, 1935 में परिभाषित के अनुसार भारत में जन्मा था और जो इस प्रकार परिभाषित भारत के बाहर किसी देश में मामूली भारत के बाहर रहने वाले
भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता
के अधिकार
तौर से निवास कर रहा है, भारत का नागरिक समझा जाएगा यदि वह नागरिकता प्राप्ति के लिए भारत डोमिनियन की सरकार द्वारा या भारत सरकार द्वारा विहित प्रारूप में और रीति से अपने द्वारा उस देश में, जहाँ वह तत्समय निवास कर रहा है, भारत के राजनायिक या कौंसलीय प्रतिनिधि को इस संविधान के प्रारंभ से पहले या उसके पश्चात् आवेदन किए जाने पर ऐसे राजनयिक या कौंसलीय प्रतिनिधि द्वारा भारत का नागरिक रजिस्ट्रीकृत कर लिया गया है।
- ग-प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्णगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत
का नागरिक है या समझा जाता है, ऐसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जो संसद द्वारा बनाई जाए, भारत का नागरिक बना रहेगा।
नागरिकता के अधिकारों
का बना रहना
- इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों की कोई बात नागरिकता के अर्जन और समाप्ति के
संसद द्वारा नागरिकता के
अधिकार का विधि द्वारा
तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में उपबंध करने की संसद की शक्ति का अल्पीकरण नहीं करेगी।“
विनियमन किया जाना