89
पर बहस में हिस्सा लेंगे उन्हें यह प्रथम प्रस्थापना में रखनी चाहिए। वे यह न समझे कि हम संविधान के प्रारंभ की तारीख से नागरिकता के लिए जो उपबंध करने जा रहे हैं वे स्थायी या अविकल रहने वाले हैं। हम तो बस फिलहाल तदर्थ आधार पर विनिश्चय करने जा रहे हैं।
इसके बाद, मैं सदस्यों का ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहता हूँ कि संविधान के प्रारंभ की तारीख से नागरिकता प्रदान करने के लिए प्रारूपण समिति ने पांच भिन्न प्रकार के लोगों के लिए उपबंध किया है जो उस तारीख से नागरिक बन सकते हैं जिस तारीख से संविधान प्रारंभ होता है। बशर्ते वे उन निबंधनों ओर शर्तों को पूरा करते हों जो अनुच्छेद में अधिकथित हैं।
ये पांच प्रवर्ग है
(1) भारत में अधिवास करने वाले और भारत में जन्मे। दूसरे शब्दों में, भारत की अधिकांश आबादी जैसाकि संविधान में परिभाषित है;
(2) वे व्यक्ति जो भारत में अधिवास करते हैं किन्तु जो भारत में नहीं जन्मे हैं बल्कि जो भारत में निवास करते हैं। उदाहरण के लिए वे व्यक्ति जो भारत में पुर्तगाली बस्तियों की या भारत में फ्रांसीसी बस्तियों की प्रजा हैं जैसे चन्दरनागोर, पांडिचेरी, अथवा उस काम के लिए ईरानी जो पर्सिया से आए हैं और यद्यपि वे यहाँ पेदा नहीं हुए हैं फिर भी वे यहाँ लम्बे समय से रहते हैं और निःसंदेह उनका आशय भारत के नागरिक बनना है।
लोगों के तीन अन्य प्रवर्ग, जिन्हें प्रारूपण समिति इस अनुच्छेद की परिधि में लाना चाहती है, ये हैं-
(3) वे लोग जो भारत में निवासी हैं लेकिन जो पाकिस्तान को प्रव्रजन कर गए हैं,
(4) वे लोग जो पाकिस्तान के निवासी हैं और जो भारत को प्रव्रजन कर गए हैं।
(5) वे लोग जो स्वयं या जिनके माता-पिता भारत में जन्मे है लेकिन भारत के बाहर रहते हैं।
ये लोगों के पांच प्रवर्ग हैं जो इस अनुच्छेद के उपबंधों से शासित हैं। अब प्रथम प्रवर्ग के लोग अर्थात् वे व्यक्ति जो भारत के राज्यक्षेत्र में अधिवास करते हैं और भारत के राज्यक्षेत्र में जन्में हैं या जिनके माता-पिता भारत के राज्यक्षेत्र में जन्मे हैं उनके बारे में अनुच्छेद 5 क खंड (क) और (ख) लागू होते हैं। उसमें दी गई शर्तों को पूरा करते हैं तो वे उन उपबंधों के अधीन नागरिक होंगे।