अनुच्छेद 5 और 6 - Page 112

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नियुक्त अधिकारी को आवेदन करें और वह व्यक्ति इस प्रकार किए गए आवेदन पर उस अधिकारी द्वारा रजिस्ट्रीकृत कर लिया जाए।

जो व्यक्ति संविधान के प्रारंभ की तारीख को नागरिकता प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान से भारत आए हैं वे दो प्रवर्गों में रखे गए हैं - वे व्यक्ति जो 19 जुलाई, 1948 से पहले आए हैं और वे व्यक्ति जो उसके बाद आए हैं। जो लोग 19 जुलाई, 1948 से पहले भारत आए हैं उनकी नागरिकता स्वतः हो गई है। उनके बारे में कोई शर्तें नहीं, कोई प्रक्रिया निर्धारित नहीं की गई है। जो व्यक्ति उसके बाद आए हैं उनके बारे में कुछ शर्ते निर्धारित की गई हैं और उन शर्तों के पूरा होने पर वे भी हमारे द्वारा अब प्रस्तावित अनुच्छेद के अधीन नागरिक के हकदार बन जाएंगे।

अब मैं उन लोगों पर आता हूँ जो पाकिस्तान में प्रव्रजन कर गए थे लेकिन भारत लौट आए हैं। उनके बारे में स्थिति इस प्रकार है। मुझे इस विषय में उतनी जानकारी नहीं है जितनी संभवतः संबंधित मंत्रियों को होगी। लेकिन हमने जो प्रस्ताव रखा है वह यह है : यदि कोई व्यक्ति पाकिस्तान प्रव्रजन कर गया था और वहाँ जाने के बाद एक परमिट के आधार पर फिर भारत लौट आया है जो उसे भारत सरकार द्वारा भारत में प्रवेश के लिए ही नहीं था बल्कि ऐसा परमिट था जो उसे पुनः बसने या स्थायी वापसी का हकदार बनाएगा, वही व्यक्ति इस संविधान के प्रारंभ पर भारत का नागरिक बनने का हकदार हो जाएगा। इस उपबंध को पुरःस्थापित करना पड़ा, क्योंकि भारत सरकार ने उन लोगों को जो पाकिस्तान चले गए थे और जो बाद में पाकिस्तान से भारत आ गए हैं, भारत आकर एक व्यवस्था के अन्तर्गत स्थायी तौर पर बसने के लिए अनुज्ञात कर दिया है जिसे ’परमिट व्यवस्था’ कहते हैं। यह व्यवस्था 19 जुलाई, 1948 से प्रारंभ की गई है। अतः अनुच्छेद 5-ख में अन्तर्विष्ट उपबंध उन व्यक्तियों की नागरिकता के विषय में है जो पाकिस्तान से आने के बाद पाकिस्तान चले गए हैं और फिर भारत लौट आए हैं। उपबंध किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति पुनः बसने या स्थायी वापसी के लिए जारी किए गए परमिट के आधर पर भारत आया है वही संविधान के प्रारंभ की तारीख को नागरिक बनने का हकदार हो जाएगा।

महोदय, मेरा निवेदन है, सीमित प्रयोजन के लिए अर्थात् संविधान के प्रारंभ की तारीख को नागरिकता प्रदान करने के प्रयोजन के लिए हर प्रकार के मामले को समाविष्ट करना संभव नहीं है। यदि ऐसे प्रवर्ग के व्यक्ति हैं जो इस संशोधन में अन्तर्विष्ट उपबंध द्वारा बाहर रखे गए हैं उनके लिए हमने संसद को बाद में उपबंध करने की शक्ति दी है। मैं सदन को सुझाव देता हूं कि जो, संशोधन मैंने प्रस्तावित किए हैं वे इस समय के प्रयोजन के लिए पर्याप्त हैं। मुझे आशा है, सदन इन संशोधनों को स्वीकार करने में समर्थ होगा।