अनुच्छेद 5 और 6 - Page 113

92 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री बी. एम. गुप्ता (बम्बई : साधारण) : क्या परमिट व्यवस्था 19 जुलाई, 1948 को आरंभ कर दी गई थी।

माननीय डॉ. बी. आर अम्बेडकर : हाँ, 19 जुलाई, 1948 को एक अध्यादेश पारित किया गया था कि कोई व्यक्ति तब तक यहाँ नहीं आएगा जब तक उसके पास परमिट न हो, और 19 जुलाई, 1948 को भारत सरकार ने उसके अधीन कुछ नियम बनाए जिनके द्वारा व्यवस्था की गई थी कि पाकिस्तान से भारत आने वाले व्यक्ति को, जो खास तौर पर यह कहे कि वह यहाँ आने का हकदार है, परमिट जारी किया जा सकेगा। ये परमिट तीन प्रकार के हैं, अस्थायी परमिट, स्थायी परमिट, और पुनःस्थापन या स्थायी वापसी के लिए परमिट। अंतिम पुनःस्थापन और स्थायी वापसी के अभिव्यक्त उद्देश्य के साथ वापस आने के लिए अनुज्ञा दी गई है। वही व्यक्ति इस अनुच्छेद में सम्मिलित किए जाने के लिए प्रस्तावित हैं, अन्य नहीं।

माननीय सभापति : मेरे विचार में, हम संशोधनों को कल लेंगे।

* माननीय सभापति : और मैं नहीं समझता कि और भाषणों से कोई उपयोगी प्रयोजन सिद्ध होगा। संशोधन सदस्यों के समक्ष हैं; वे अपनी मर्जी से किसी भी संशाधन के पक्ष में वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं।

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मेरे लिए उन सभी मुद्दों को अंकित करना संभव नहीं है जो उनके द्वारा उठाये गए हैं जिन्होंने मेरे द्वारा प्रस्तावित प्रारूप अनुच्छेदों की आलोचना की, मैं नहीं समझता कि आलोचना की हर पंक्ति पर ध्यान देना आवश्यक है। मेरे लिए अधिक सारवान मुद्दों को लेना और उनका जवाब देना पर्याप्त है।

मेरे मित्र डॉ. देशमुख ने कहा कि प्रारूप अनुच्छेदों द्वारा हमने अपनी नागरिकता को बहुत सस्ता बना दिया है। मैं सोचता हूँ कि यदि उन्हें वे नियम ज्ञात होते जो नागरिकता की विधि पर लागू होते हैं तो वे समझ गए होते कि हमारी नागरिकता उसकी अपेक्षा सस्ती नहीं है जो दूसरे देशों द्वारा निर्धारित कानूनों द्वारा बनाई गई है।

जहाँ तक मेरे मित्र प्रो. के. टी. शाह द्वारा उठाये गए मुद्दे का संबंध है कि इन अनुच्छेदों में निश्चित प्रतिषेध का उपबंध करके अनुच्छेद 6 के अधीन उन देशों के निवासियों को नागरिकता न देने के लिए संसद के प्राधिकार को सीमित कर देना चाहिए जो वहाँ रहने वाले भारतीयों को नागरिकता देने से इंकार करते हैं। मेरे विचार में, इस विषय को संसद पर छोड़ देना चाहिए कि वह उस समय विद्यमान परिस्थितियों के अनुसार विनिश्चय करे।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 12 अगस्त, 1949, पृ. 422-24