अनुच्छेद 5 और 6 - Page 114

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आलोचना के जिन बिंदुओं से मैं ज्यादा चिंतित हूँ वे हैं जो अनुच्छेदों के उन भागों पर लगाये गए हैं जो पाकिस्तान से भारत आने वालों के विषय में हैं और भारत से पाकिस्तान गए आप्रवासियों के विषय में हैं। जहाँ तक उपबंध के प्रथम भाग का संबंध है, जो पाकिस्तान से भारत आने वाले अप्रवासियों के विषय में हैं, आलोचना मुख्यतः असम के प्रतिनिधियों द्वारा की गई है, विशेष रूप से मेरे मित्र श्री रोहिणी कुमार चौधरी द्वारा की गई है। यदि मैंने उन्हें सही समझा है तो उनकी दलील है कि पाकिस्तान से भारत आने वाले अप्रवासियों विषयक अनुच्छेदों के माध्यम से पूर्वी बंगाल से असम आने वाले बंगालियों और मुसलमानों दोनों के लिए दरवाजे

खोल दिए गए हैं जिससे उनकी अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाएगी अथवा उस प्रांत में साम्प्रदायिक अनुपात का संतुलन बिगड़ जाएगा। महोदय, मेरे विचार में उन्होंने अनुच्छेदों के तात्पर्य को बिल्कुल गलत समझा है जो पाकिस्तान से भारत आने वाले अप्रवासियों के बारे में हैं।

यदि वे उपबंधों को दोबारा पढें़गे तो वे देखेंगे कि जो लोग 19 जुलाई, 1948 से पहले असम में प्रवेश कर चुके हैं उन को स्वतः असम के नागरिक तभी घोषित किया गया है जब वे भारत के राज्यक्षेत्र में निवास करते हैं। लेकिन उन लोगों के बारे में जिन्होंने 19 जुलाई, 1948 के बाद असम में प्रवेश किया है चाहे वे हिन्दू बंगाली हैं या मुस्लिम, वे रखेंगे कि नागरिकता हासिल करना कतई स्वतः प्रक्रिया नहीं है। 19 जुलाई, 1948 के पश्चात् असम में प्रवेश करने वालों के लिए तीन शर्तें निर्धारित की गई हैं। पहली शर्त यह है कि ऐसा व्यक्ति नागरिकता के लिए आवेदन करे। वह यह साबित करे कि वह असम में छह मास से रह रहा है और तीसरी शर्त जो बहुत कठोर शर्त है वह है कि वह भारत की डोमिनियन सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी द्वारा रजिस्ट्रीकृत हो। मैं बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में कहना चाहूँगा कि यह रजिस्ट्रेशन शक्ति एक पूर्ण शक्ति है। किसी व्यक्ति ने आवेदन किया है, वह असम में छह मास से रहता है, मात्र इन तथ्यों से रजिस्ट्रीकृत अधिकारी पर उसे रजिस्टर करने का कोई उत्तर दायित्व, कर्त्तव्य या बाध्यता नहीं होगी। आवेदन किए जाने के बावजूद, उसके असम में छह मास से निवास करने के बावजूद उस अधिकारी के पास फिर भी यह विनिश्चय करने के लिए पर्याप्त विवेकाधिकार होगा कि उसे रजिस्टर किया जाना चाहिए या नहीं किया जाना चहिए। दूसरे शब्दों में, वह अधिकारी, ऐसी सामग्री पर जो उसके समक्ष प्रस्तुत की जाए, उस तात्पर्य की जांच करेगा जिसके लिए वह आया है जैसे क्या वह भारत में स्थायी नागरिक बनने के सदभाविक हेतु से आया है या वह किसी अन्य प्रयोजन से आया है। अब, मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि इन तीन प्रतिबंधक शर्तों को ध्यान में रखते हुए, जो उन व्यक्तियों को लागू की गई हैं, जो 19 जुलाई, 1948 के बाद असम में आते हैं, ऐसा