94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कोई भय जैसा मेरे मित्र श्री रोहिणी कुमार चौधरी द्वारा व्यक्त किया गया है, कि बंगालियों द्वारा या मुसलमानों द्वारा असम के लोगों को दबा लिया जाएगा, मुझे बिल्कुल निराधार प्रतीत होता है। इसके पश्चात् मैं उस आलोचना पर आता हूँ जो भारत से पाकिस्तान गए अप्रवासियों विषयक उपबंधों के बारे में की गई है। मेरा विचार है कि जो इन अनुच्छेदों की आलोचना करते हैं उन्होंने स्पष्ट रूप से नहीं समझा है कि इसमें सही क्या प्रस्तावित है। इसलिए मैं अनुच्छेद की अन्तर्वस्तु को पुनः बताता हूँ। उन उपबंधों के अनुसार जो भारत से पाकिस्तान गए अप्रवासियों के विषय में हैं, जिन्होने 1 मार्च 1947 के पश्चात् भारत छोड़ा है, सिवाय एक छोटे से अपवाद के, उन्हें भारत का नागरिक नहीं घोषित किया गया है मेरे विचार में यह बात बहुत ध्यान से समझ लेनी चाहिए। यह एक सामान्य और सार्वभौमिक प्रस्थपना है जिसे हमने प्रतिपादित किया है। हमने जो सिद्धांत प्रतिपादित किया है उसका उल्लेख करना आवश्यक है क्योंकि अन्तर्राष्ट्रीय विधि के अनुसार जन्म से अधिवास प्रदत्त होता है, किसी व्यक्ति को या तो आवेदन द्वारा या किसी अन्य पद्धति द्वारा या किसी प्रकार की कृपा से, किसी विशेष प्रयास द्वारा जन्म का अधिवास अर्जित करना नहीं पड़ता। अधिवास का उद्भव जन्म से होता है। यह महसूस किया गया कि जिन लोगों ने भारत छोड़ दिया था लेकिन जो भारत में जन्मे थे वे इस बात के बावजूद कि वे पाकिस्तान चले गए, अन्तर्राष्ट्रीय विधि के सिद्धांत के आधार पर फिर भी उद्भव के अपने अधिवास का दावा यथावत कर सकते हैं। उनके पास ऐसी कोई प्रतिरक्षा न रहे इस दृष्टि से यह पूरी तरह स्पष्ट करना बुद्धिमत्तापूर्ण समझा गया कि जो भी 1 मार्च के बाद पाकिस्तान चला गया है - आप सब जानते हैं कि हमने 1 मार्च की तारीख बड़ी सोच-समझकर रखी है, क्योंकि यह वह तारीख है जब दंगे फैले थे और निष्क्रमण शुरू हुआ था और हमने सोचा था कि यदि हम यह उपधारित कर लें कि कोई आदमी, जो दंगों के कारण पाकिस्तान स्थायी रूप से रहने के आशय से चला गया है, भारत में नागरिकता का अपना अधिकार खो देता है तो अन्तर्राष्ट्रीय विधि के किसी भी सिद्धांत का उल्लंघन नहीं है। इन दो बातों के लिए हमने इस स्वाभाविक कल्पना को नियम के रूप में बदल दिया है और यह अधिकथित किया है कि जो कोई भी जो 1 मार्च के बाद पाकिस्तान चला गया है वह यह कहने का हकदार नहीं होगा कि उसका भारत में अधिवास है। अनुच्छेद 5 के अनुसार अधिवास नागरिकता के लिए अनिवार्य सांटक है, जो लोग पाकिस्तान चले गए उन्होंने भारत में अपना अधिवास गंवा दिया और नागरिकता खो दी।
अब मैं एक अपवाद पर आता हूँ। ऐसे लोग भी हैं जो भारत छोड़ कर पाकिस्तान चले गए थे वे बाद में भारत में लौट आए हैं। ठीक है, इसमें भी हमारा सिद्धांत है कि जो भारत लौट आता है वह तब तक भारत का नागरिक नहीं समझा जाता है